गुरुवार, 14 नवंबर 2024

15 नवम्बर

15 नवम्बर #DayToBeRemembered
जनजातीय गौरव दिवस
#Tribes #BirsaMunda #JanjatiyaGauravDiwas
15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' मनाया जाता है।यह दिन बिरसा मुंडा की जयंती के रूप में मनाया जाता है। उनकी 150वीं जयंती इस वर्ष मनाई जा रही है।आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 को हुआ था। झारखंड, बिहार और ओडिशा समेत आदिवासी इलाकों में उन्हें बिरसा भगवान भी कहा जाता है। उनकी स्मृति में भारत सरकार ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को हर साल 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की है।
विश्व दर्शन दिवस 
#WorldPhilosophyDay
इस वर्ष 15 नवम्बर को विश्व दर्शन दिवस (World Philosophy Day) भी मनाया जा रहा है। दरअसल हर वर्ष नवम्बर के तीसरे गुरुवार को विश्व में दार्शनिक चिंतन का सम्मान करने के लिए दर्शन दिवस मनाने की परंपरा है। यह संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की एक पहल है जो दुनिया के लोगों को समकालीन मुद्दों पर साझा चिंतन में शामिल होने के लिए आकर्षित करती है। यूनेस्को ने 2002 में विश्व दर्शन दिवस की शुरुआत की ताकि दुनिया भर में दार्शनिक चिंतन को सम्मानित किया जा सके और लोगों को अपनी दार्शनिक विरासत को साझा करने, नए विचारों पर मंथन और सामाजिक चुनौतियों पर सार्वजनिक बहस को प्रेरित करने के लिए जगह बनाई जा सके। २००४ में यूनेस्को के महानिदेशक कोइचिरो मत्सूरा ने इस पर संदेश में कहा था कि दर्शन ने लोकतंत्र, मानवाधिकार, न्याय और समानता के सिद्धांतों और मूल्यों को वैचारिक आधार दिया है, जिन्होंने विश्व शांति की संभावना को आकार दिया है। समाज की अनसुलझी समस्याओं और अनुत्तरित प्रश्नों पर चिंतन हमेशा दार्शनिक विश्लेषण और सोच के केंद्र में रहा है(टाइम एंड डेट डॉटकॉम)। यूनेस्को महानिदेशक ऑड्रे अज़ोले (२०२२) का संदेश है - बेहतर दुनिया बनाने के लिए, शांति के आदर्श की ओर बढ़ने के लिए, हम जानते हैं कि हमें एक दार्शनिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए - अर्थात, हमें संकटों के कोलाहल से परे, अपनी दुनिया की खामियों पर सवाल उठाना चाहिए। इसलिए जब नैतिक सिद्धांतों को परिभाषित करने की बात आती है, जो मानवता का मार्गदर्शन करना चाहिए, तो दर्शनशास्त्र आवश्यक है (यूनेस्को)।
राष्ट्रीय परोपकार दिवस
#NationalPhilanthropyDay
अमेरिका में हर साल १५ नवम्बर को राष्ट्रीय परोपकार दिवस मनाया जाता है। १९८० के दशक में डगलस फ्रीमैन ने इसकी अवधारणा पेश की और राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 15 नवंबर को राष्ट्रीय परोपकार दिवस घोषित किया। 1986 से हर साल अमेरिका में दुनिया भर के समुदाय दानदाताओं, स्वयंसेवकों, फाउंडेशनों, नेताओं, निगमों और परोपकार में लगे अन्य लोगों की गतिविधियों को मान्यता देने के लिए कार्यक्रम किये जाते हैं।

बुधवार, 13 नवंबर 2024

14 नवम्बर

#DateToBeRemembered
१४ नवम्बर 
#BalDiwas #Children'sDay #NehruBirthDay
१४ नवम्बर को बाल दिवस मनाया जाता है। वैसे मूल रूप से यह भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। लेकिन बच्चों के प्रति पंडित नेहरू के स्नेह के कारण उनके निधन के बाद भारत में १४ नवम्बर को बाल दिवस मनाया जाने लगा। इससे पहले बाल दिवस २० नवम्बर को मनाया जाता था, जो संयुक्त राष्ट्र की ओर से विश्व बाल दिवस के रूप में घोषित है। पंडित नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। १९४८ में १४ नवम्बर को ही ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स तृतीय का जन्म हुआ था।
विश्व मधुमेह दिवस 
#WorldDiabetesDay
१४ नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस भी मनाया जाता है। दरअसल इसी दिन सर फ्रेडरिक बेन्टिंग का जन्म हुआ जिन्होंने 1921 में इन्सुलिन की खोज में योगदान दिया। बेन्टिंग और चार्ल्स बेस्ट ने मिलकर इंसुलिन की खोज की थी जो मधुमेह रोगियों के लिए जीवन रक्षक है। इन्टरनेशनल डायबिटीज फेडेरेशन (आईडीएफ) की ओर से उन्हीं की याद में मधुमेह को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 14 नवम्बर को विश्व डायबिटीज दिवस मनाया जाता है।  1991 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ (IDF) ने मधुमेह से  स्वास्थ्य को खतरे के बारे में बढ़ती चिंताओं को देखते हुए विश्व मधुमेह दिवस (WDD) मनाना शुरू किया। इसे मधुमेह और लोगों के जीवन के साथ-साथ समाज पर इसके प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान के रूप में शुरू किया गया था। २००७ में संयुक्त राष्ट्र में १४ नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस मनाने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया था। हर वर्ष विश्व मधुमेह दिवस अलग अलग थीम पर मनाया जाता है। 

मंगलवार, 12 नवंबर 2024

१३ नवम्बर


#WorldKindnessDay
हर साल १३ नवम्बर को विश्व दयालुता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व में दया, करुणा और उदारता से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसकी शुरूआत 1998 में कुछ वैश्विक गैर-सरकारी संगठनों ने विश्व दयालुता आंदोलन के बैनर तले की थी। सिंगापुर, कनाडा , ऑस्ट्रेलिया , नाइजीरिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में विश्व दयालुता दिवस मनाने की परंपरा है ताकि जरूरतमंदों की मदद, दूसरों की तकलीफ और परेशानियों को दूर या कम करने के प्रयास को बढ़ावा मिले। 
#ParisAttack
पेरिस हमला 
१३ नवम्बर को एक तरफ करुणा और दया को बढ़ावा दिया जाता है तो दूसरी तरफ २०१५ में इसी दिन फ्रांस की राजधानी पेरिस बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था।आतंकवादियों ने थिएटर, कंसर्ट हॉल, रेस्तरां और स्टेडियम सहित कई जगहों पर हमलों को अंजाम दिया, जिनमें कम से कम 130 लोगों की मौत हुई और 350 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। 
इस मायने में १३ नवम्बर का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन एक ओर अच्छाई और भलाई का संदेश देता है तो दूसरी ओर विश्व के उन भटके हुए, गुमराह लोगों की जघन्य करतूत की याद भी दिलाता है जो इसी दिन सैकड़ों लोगों को जिंदगी भर के लिए जख्म दे गये।
- कुमार कौस्तुभ 

आज से नयी श्रृंखला - १२ नवंबर


लोक सेवा प्रसारण दिवस
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#PublicServiceBroadcastingDay
वर्ष 1947 में आज ही के दिन राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी नयी दिल्ली में आकाशवाणी के स्‍टुडियो पहुंचे थे। इसकी स्‍मृति में हर वर्ष 12 नवम्‍बर को यह दिवस मनाया जाता है । राष्ट्रपिता की इस ऐतिहासिक यात्रा के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 12 नवंबर 1997 को दोपहर 3 बजे आकाशवाणी परिसर में एक समारोह आयोजित किया गया। बाद में वर्ष 2001 में इस दिन को आधिकारिक तौर पर लोक सेवा प्रसारण दिवस के रूप में घोषित किया गया। 
दरअसल १२ नवंबर १९४७ को महात्मा गांधी को कुरुक्षेत्र जाकर वहां ठहरे ढाई लाख शरणार्थियों को संबोधित करना था। लेकिन किसी कारणवश वे वहां नहीं पहुंच सके तो आकाशवाणी भवन के स्टूडियो से उनके संबोधन की व्यवस्था की गई। इसीलिए महात्मा गांधी उस दिन ३ बजे विशेष प्रसारण के लिए आकाशवाणी भवन पहुंचे थे। इसी की याद में १२ नवंबर को लोक सेवा प्रसारण दिवस घोषित किया गया।

विश्व निमोनिया दिवस
#WorldPneumoniaDay
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श्वास संबंधी बीमारी निमोनिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 12 नवंबर को 'विश्व निमोनिया दिवस' मनाया जाता है। निमोनिया दिवस पहली बार 2009 में ग्लोबल कोएलिशन अगेंस्ट चाइल्ड न्यूमोनिया (Global Coalition against Child Pneumonia) की ओर से मनाया गया था। तब से हर साल विश्व निमोनिया दिवस 12 नवंबर को एक खास थीम के साथ मनाया जाता रहा है, ताकि वैश्विक स्तर पर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके।स्टॉप निमोनिया संगठन के एक अनुमान के अनुसार, 2009 में निमोनिया के कारण लगभग 2.5 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें 6,72,000 बच्चे शामिल थे। २००९ में इस दिन लगभग 100 संगठन निमोनिया के साथ-साथ अन्य रोकथाम योग्य बीमारियों के कारण बाल मृत्यु को कम करने के मिशन के समर्थन में आगे आए। निमोनिया दिवस का लक्ष्य 2030 तक निमोनिया का उन्मूलन  करना है। 

पक्षी विज्ञानी डॉ सालिम अली का जन्मदिन 
#NationalBirdDay
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12 नवंबर को प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सलीम अली का जन्मदिन भी मनाया जाता है। यह पक्षियों के संरक्षण और उनके बारे में जागरूकता फैलाने का एक खास अवसर है। सालिम अली बर्डमैन ऑफ इंडिया के नाम से भी जाने जाते हैं। इसलिए उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय पक्षी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। हालांकि अमेरिका में राष्ट्रीय पक्षी दिवस ५ जनवरी को और विश्व प्रवासी पक्षी दिवस हर साल मई में मनाया जाता है। अक्टूबर में भी पक्षी दिवस मनाने की परंपरा है।



सोमवार, 11 नवंबर 2024

भारत की बल्ले-बल्ले!


#Trump #IndiaUS #USIndia #ModiTrump
अमेरिका में ट्रंप राज आने के बाद भारत को कितना फायदा होगा और कितना नुक़सान इसका हिसाब-किताब होने लगा है। ट्रंप की नीतियों की वजह से यह विचार करना फिलवक्त लाजिमी ही है कि आने वाले समय में अमेरिका के साथ भारत के संबंध कितने सहज रहेंगे। लेकिन गहराई से गौर करें तो ऐसा लगता है कि भारत के साथ रिश्तों को लेकर ट्रंप प्रशासन को बहुत टेढ़ा रुख अपनाने के बजाय संजीदगी से चलना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप अपने राष्ट्रीय हितों के मामले में पीछे हटने वाले नहीं हैं तो भारत के पीएम मोदी भी कम नकाहीं हैं।  मोदी का लोहा तो ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में ही मान चुके थे और उन्हें "Very though negotiator" करार दे चुके थे क्योंकि ट्रंप के लिए अमेरिका फर्स्ट की सोच अहम है तो मोदी भी राष्ट्र प्रथम की नीति को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं। राजनीति में आने से पहले ट्रंप मंजे हुए कारोबारी रहे हैं तो मोदी की रगों में भी गुजराती रक्त बहता है जिसके कतरे-कतरे में कारोबार है। लिहाजा इसमें कोई शक नहीं कि ट्रंप को साधने में मोदी को कोई दिक्कत नहीं होगी। और ट्रंप मोदी से दोस्ती का भी दम भरते हैं तो देखना ये भी होगा कि अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप को भारत के प्रति कितने उदार रह पाते हैं।
हालांकि, गौर करने वाली बात यह भी है कि पीएम मोदी के दस वर्षों के कार्यकाल में भारत के विदेश संबंध हर तरह से मजबूत हुए हैं और हकीकत यह है कि भारत अब किसी भी मामले में केवल अमेरिका या चीन पर निर्भर नहीं रहा बल्कि अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दूसरे विकल्प भी तलाश लिये हैं। रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में रूस का सहयोग भारत को मिल ही रहा है, जो अमेरिका को अब तक फूटी आंखों नहीं सुहाता रहा है। फ्रांस और स्पेन के साथ भी भारत का रक्षा सहयोग बढ़ा है। वहीं, भारतीय मैनपावर को रोजगार और शिक्षा के मामले में अगर कनाडा के बाद अमेरिका से भी रेड सिग्नल मिलता है तो जर्मनी और यूरोप के दूसरे देश भारतीयों के लिए पलक-पांवड़े बिछाए हुए हैं। जर्मनी पिछले दिनों हर साल ९० हजार भारतीयों के लिए वर्क वीज़ा देने का एलान कर ही चुका है। तो कई मामलों में ऑस्ट्रेलिया और जापान भी भारत के अच्छे मददगार हैं। 
ऐसे में भारत को विदेशी सहयोग का दायरा बढ़ा ही है जबकि एशिया में चीन से लोहा लेने के लिए भारत को साथ लेकर चलना अमेरिका की मजबूरी रहेगी। 
तो अमेरिका फर्स्ट का राग अलापने वाले ट्रंप को भारत के साथ रिश्तों के मामले में लचीलापन अपनाना ही होगा , इसके अलावा उनके समक्ष कोई और चारा भी नहीं है। तो ट्रंप के आने से भारत को फायदा ही होगा, बल्ले-बल्ले ही रहेगी।
© कुमार कौस्तुभ 

बुधवार, 6 नवंबर 2024

कमला की लुटिया ले डूबी बाइडेन की बरजोरी


#KamlaHarris #Trump #USElections #Biden
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव 2024 में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को भले ही हार का सामना करना पड़ा लेकिन जितनी कड़ी टक्कर उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप को दी उसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता। यह भी माना जाना चाहिए कि यदि कमला हैरिस को समय से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया होता तो वे ट्रंप को हरा भी सकती थीं। इसमें कहीं न कहीं निवर्तमान होने जा रहे राष्ट्रपति जो बाइडेन की महत्वाकांक्षा जरूर आड़े आई। 81 वर्ष के बाइडेन को यह समझने में बहुत देर लग गई कि उनकी उम्र और सेहत अब उनके लिए इस पद के माकूल नहीं है और इसका खामियाजा सीधे सीधे उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को भुगतना पड़ा जिन्हें बहुत देर से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवार घोषित किया गया। तब तक बाइडेन पर हमलावर ट्रंप कहीं न कहीं लीड ले चुके थे। लिहाजा कमला हैरिस को ट्रंप के आक्रामक चुनाव प्रचार की चुनौती से निपटने के लिए अपेक्षाकृत बहुत ही कम समय मिला। वहीं कमला हैरिस के मैदान में आने के बाद ट्रंप उनकी छवि पर भी वार करने से नहीं चूके जो स्वाभाविक ही था। कुल मिलाकर हालात कमला के पक्ष में बनने से रह गये और अमेरिका एक बार फिर इतिहास रचने से चूकी गया। कमला हैरिस अगर जीत गयी होती तो वे न केवल अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति होतीं बल्कि अमेरिका में इस सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली पहली भारतवंशी भी होतीं। लेकिन, बाइडेन की बरजोरी के कारण अमेरिका में नया इतिहास बनने से रह गया। © कुमार कौस्तुभ