रविवार, 6 अप्रैल 2025

6 अप्रैल


6 अप्रैल 
विकास और शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस
International Day of Sport for Development and Peace
6 अप्रैल को विकास और शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है , जो कि विश्व में अंकित पारंपरिक खेलों और खेलों की श्रृंखला का पता लगाने का अवसर है। खेल निष्पक्षता, टीम निर्माण, समानता, समावेश और दृढ़ता को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, खेल और शारीरिक गतिविधि हमें चिंताओं को कम करके, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करके और सामाजिक संबंधों को मजबूत करके संकट के समय से बाहर निकलने में भी मदद कर सकती है।विकास और शांति हेतु अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस पहली बार 2014 में मनाया गया था। विकास और शांति हेतु अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस दुनिया भर में समुदायों और लोगों के जीवन में खेल और शारीरिक गतिविधि की सकारात्मक भूमिका को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। 1896 में 6 अप्रैल के दिन प्रथम आधुनिक ओलंपिक का शुभारंभ किया गया था। 23 अगस्त 2013 को संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की कि विकास और शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस हर साल 6 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह तारीख 1896 में एथेंस में पहले आधुनिक ओलंपिक खेलों के उद्घाटन का भी प्रतीक है। संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से इस महत्वपूर्ण उपलक्ष्य व विश्व शांति व विकास हेतु खेल की जादुई व विस्मयकारी शक्ति को पूरे विश्व में मर्यादित करने के उद्देश्य से विश्व खेल-दिवस घोषित किया गया था।

भाजपा स्थापना दिवस 
BJP की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई, लेकिन इसका इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा है। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचार पर भारत के चुप रहने पर जवाहरलाल नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की। डॉ. मुखर्जी के नेतृत्व में जनसंघ ने कश्मीर को विशेषाधिकार देने का विरोध किया। उन्हें जेल में डाल दिया गया, जहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। भले ही BJP की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई, लेकिन इसका इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा है। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचार पर भारत के चुप रहने पर जवाहरलाल नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की। डॉ. मुखर्जी के नेतृत्व में जनसंघ ने कश्मीर को विशेषाधिकार देने का विरोध किया। उन्हें जेल में डाल दिया गया, जहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 1967 में भारतीय जनसंघ एवं दीनदयाल उपाध्याय के नेतृत्व में कई राज्यों में कांग्रेस का एकाधिकार टूटा और कांग्रेस को राज्यों में हार मिलनी शुरू हुई। 1977 में जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर सभी कांग्रेस-विरोधी दल एकजुट हुए और ‘जनता पार्टी’ बनाई। भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय 1 मई 1977 को हुआ। जनता पार्टी का प्रयोग ज्यादा दिन नहीं चला। तब 6 अप्रैल 1980 को नए संगठन के तौर पर BJP बनी। अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष बने। 1984 के लोकसभा चुनावों में इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति लहर थी और भाजपा सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल कर सकी।
1989 में बोफोर्स और अन्य मुद्दों के चलते भाजपा आगे बढ़ी और तब उसके पास 85 सीटें थीं। मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ा तो 1991 में पार्टी की सीटें बढ़कर 120 हो गईं। 1993 में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल और मध्य प्रदेश में भी भाजपा के वोट बढ़े। 1995 में आंध्र, कर्नाटक, बिहार, ओडिशा, गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी कमल खिला।1996 में BJP ने 161 सीटें जीतीं और लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, पर बहुमत नहीं होने से 13 दिन में ही सरकार गिर गई। 1998 के मध्यावधि चुनावों में BJP ने सहयोगी दलों के साथ NDA बनाया और सत्ता में आई। 1999 में अन्नाद्रमुक ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। अक्टूबर-1999 में NDA ने 303 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया। BJP 183 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।2004 में वाजपेयी के नेतृत्व में इंडिया शाइनिंग का नारा दिया गया, पर चला नहीं और कांग्रेस के 222 की तुलना में उसे 186 सीटें ही मिलीं। 2009 में भाजपा की सीटें घटकर 116 रह गईं। 2014 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 282 सीटें जीतीं और 543 में से NDA ने 336 सीटों पर जीत हासिल की। मोदी 26 मई 2014 को देश के 15वें प्रधानमंत्री बने। 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को लोकसभा में बहुमत मिला था। इसके बाद BJP ने 2019 में 303 सीटों पर जीत हासिल की और इतिहास रच दिया। 2024 के आम चुनाव में पार्टी को 242 सीटें मिलीं।

शनिवार, 5 अप्रैल 2025

5 अप्रैल


5 अप्रैल 
राष्ट्रीय समुद्री दिवस
National Maritime Day
राष्ट्रीय समुद्री दिवस हर साल 5 अप्रैल को मनाया जाता है. यह दिन भारत के समुद्री क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करने और समुद्री व्यापार के महत्व को समझाने के लिए मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 1964 में हुई थी. राष्ट्रीय समुद्री दिवस पहली बार 5 अप्रैल, 1964 को मनाया गया था। इस दिन “वरुण” नामक एक पुरस्कार उन लोगों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने भारतीय समुद्री क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर भारत सरकार समुद्री क्षेत्र के विकास और समुद्री सुरक्षा के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है। इस दिवस पर सरकार समुद्री क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोगों को पुरस्कार भी प्रदान करती है। भारत के व्यापार और वाणिज्य का बड़ा हिस्सा वैश्विक स्तर पर ले जाते हैं। राष्ट्रीय समुद्री दिवस देश के उन नौसैनिकों को “धन्यवाद” कहने का एक अवसर है जो आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे काम करते हैं। भारतीय राष्ट्रीय समुद्री दिवस 5 अप्रैल को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 1919 में इसी दिन एसएस लॉयल्टी, पहला भारतीय ध्वज व्यापारी जहाज, मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुआ था। 1964 में 5 अप्रैल को ही नौसेना ने पहली बार राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया था। भारत में स्वदेशी शिपिंग वास्तव में 5 अप्रैल 1919 के ही शुरु हुई थी. जब सिंधिया स्टीम नेवीगेशन कंपनी लिमिटेड ने अपनी पहली नौका एसएस लॉयल्टी  समुद्र में उतरी थी. यह भारत की पहला जहाज भी माना जाता है. राष्ट्रीय समुद्री दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना है।वर्ल्ड मैरिटाइम डे और नेशनल मैरीटाइम डे दोनों अलग अलग दिन मनाए जाते हैं. वर्ल्ड मैरिटाइम डे जहां सितंबर माह के अंतिम गुरूवार को मनाया जाता है, वहीं भारत में राष्ट्रीय समुद्री दिवस हर साल 5 अप्रैल को मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय विवेक दिवस 
International Day of Conscience 
शांति को बढ़ावा देने के लिए हर साल 5 अप्रैल को 'अंतर्राष्ट्रीय विवेक दिवस' मनाया जाता है। फेडरेशन ऑफ वर्ल्ड पीस एंड लव (FOWPAL) द्वारा 5 फरवरी, 2019 को संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क में अंतर्राष्ट्रीय विवेक दिवस की घोषणा के लिए एक वैश्विक अभियान शुरू किया गया था। बहरीन साम्राज्य ने "प्यार और विवेक के साथ शांति की संस्कृति को बढ़ावा देना" शीर्षक से एक ड्राफ्ट पेश किया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने अपने 73वें सत्र में 25 जुलाई, 2019 को प्रस्तावित प्रस्ताव को खारिज कर दिया और 5 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय विवेक दिवस के रूप में घोषित किया था। विवेक एक व्यक्ति की गलत और सही की व्याख्या करने की क्षमता है। मरियम-वेबस्टर के शब्दकोशों के अनुसार, यह जागरूकता की स्थिति के रूप में जाना जाता है कि किसी का कार्य या इरादा या तो नैतिक रूप से सही या गलत है, साथ ही सही काम करने के दायित्व की भावना भी है। (विविध स्रोत)

गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

4 अप्रैल


4 अप्रैल 
अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता दिवस
 International Day for Mine Awareness
 4 अप्रैल को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता दिवस (International Day for Mine Awareness) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है विश्व में खतरनाक खदानों के बारे में जागरूकता फैलाना और खनन कार्रवाई में सहायता करना। इस दिवस को मनाये जाने का प्रस्ताव पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 8 दिसंबर 2005 में पारित किया गया था। वहीं 4 अप्रैल 2006 को पहली बार यह दिवस पूरी दुनियाभर में मनाया गया। तब से लेकर हर साल 4 अप्रैल को यह दिवस मनाया जा रहा है।8 दिसंबर 2005 को, महासभा ने घोषणा की कि प्रत्येक वर्ष 4 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता और खदान कार्रवाई में सहायता दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
इसमें संयुक्त राष्ट्र और प्रासंगिक संगठनों की सहायता से राज्यों से उन देशों में राष्ट्रीय बारूदी सुरंग-कार्य क्षमताओं की स्थापना और विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया, जहां बारूदी सुरंगें और युद्ध के विस्फोटक अवशेष नागरिक आबादी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, या राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं। 20 से अधिक वर्षों से, संयुक्त राष्ट्र माइन एक्शन सर्विस ( यूएनएमएएस ) का कार्य प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं से प्रेरित रहा है और नागरिकों, शांति सैनिकों और मानवतावादियों के सामने आने वाले विस्फोटक खतरों के अनुरूप रहा है। यूएनएमएएस जीवन बचाने, संयुक्त राष्ट्र मिशनों की तैनाती और मानवीय सहायता पहुंचाने, नागरिकों की सुरक्षा, आंतरिक रूप से विस्थापितों और शरणार्थियों की स्वैच्छिक वापसी का समर्थन करने, मानवीय और पुनर्प्राप्ति गतिविधियों को सक्षम करने और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार कानून की वकालत करने के लिए काम करता है। एंटी-पर्सनल माइंस के उपयोग, भंडारण, उत्पादन और हस्तांतरण के निषेध और उनके विनाश पर कन्वेंशन , जिसे आमतौर पर एंटी-पर्सनल माइन बैन कन्वेंशन के रूप में जाना जाता है, 1997 में हस्ताक्षर के लिए खोले जाने के बाद से , 164 देशों ने इसकी पुष्टि की है या इसे स्वीकार किया है। इस अभूतपूर्व गठबंधन द्वारा वकालत ने नागरिकों पर एंटी-पर्सनल लैंडमाइन के प्रभाव के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाई और पूर्ण प्रतिबंध के लिए वैश्विक समर्थन जुटाया।संयुक्त राष्ट्र की माइन एक्शन रणनीति संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और भाग लेने वाली संस्थाओं के लिए जवाबदेही ढांचे के रूप में कार्य करती है, जो प्रभावित समुदायों का समर्थन करते हुए सशस्त्र संघर्षों के दौरान और बाद में विस्फोटक आयुध खतरों को रोकने और संबोधित करने के प्रयासों का मार्गदर्शन करती है। जैसा कि जून 2023 में IACG-MA प्रिंसिपलों द्वारा सहमति व्यक्त की गई थी, यह रणनीति अब समयबद्ध नहीं होगी और माइन एक्शन में सहायता पर महासचिव की द्विवार्षिक रिपोर्ट के साथ मेल खाने के लिए हर दो साल में आवधिक समीक्षा के अधीन रहेगी। IACG-MA के प्रिंसिपलों ने 13 दिसंबर 2023 को संयुक्त राष्ट्र की रणनीति का समर्थन किया। यह रणनीति 1 जनवरी 2024 से प्रभावी हुई।


राष्ट्रीय विटामिन सी दिवस
प्रत्येक वर्ष 4 अप्रैल को अमेरिका में राष्ट्रीय विटामिन सी दिवस पर उन सभी तरीकों के बारे में बताया जाता है जिनसे विटामिन सी हमारे स्वास्थ्य को अंदर और बाहर से पोषण और लाभ पहुंचाता है! विटामिन सी को सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है, लेकिन चिकित्सकीय रूप से यह विटामिन स्वास्थ्य के अन्य क्षेत्रों में भी एक पावरहाउस साबित हुआ है। उदाहरण के लिए, विटामिन सी रक्तचाप को कम कर सकता है और संभावित रूप से हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है। गाउट के जोखिम वाले लोग विटामिन सी का सेवन बढ़ाकर इस जोखिम को कम कर सकते हैं। स्किनस्यूटिकल्स ने इस शोध और विटामिन सी के सिद्ध लाभों का जश्न मनाने के लिए 2019 में राष्ट्रीय विटामिन सी दिवस की स्थापना की। स्किनस्यूटिकल्स के संस्थापक वैज्ञानिक डॉ. शेल्डन पिनेल के अनुसंधान ने त्वचा में विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट के प्रभावी वितरण के लिए मापदंड स्थापित किए, जिससे स्किनस्यूटिकल्स को कॉस्मेटिक्स के उद्भव में अग्रणी बनने में सहायता मिली।

विश्व गाजर दिवस 
International Carrot Day 
 दुनियाभर में हर साल 4 अप्रैल को विश्व गाजर दिवस के रूप में मनाया जाता है। गाजर दिवस को मनाने के पीछे का उद्धेश्य लोगों को गाजर का सेवन करने से मिलने वाले फायदों के प्रति जागरूक करवाना है। सबसे पहले इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2003 में हुई थी। गाजर को उसके पोषण मूल्य और बहुमुखी प्रतिभा के लिए सम्मानित किया जाता है, और यह दिन हमें गाजर के बारे में जानकारी फैलाने और इसके स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाने का मौका देता है। गाजर का वानस्पतिक नाम डाकस कैरोटा है। जानकारों का मानना है कि एशिया के लोगों ने सबसे पहले गाजर की खेती की शुरुआत की और वहीं से ये विश्व के अन्य देशों में पहुंची। गाजर चार अलग-अलग रंगों लाल,पीली, संतरी और काली रंग की पाई जाती है। जानकारों का मानना है कि गाजर की मूल उत्पत्ति पंजाब और कश्मीर की पहाड़ियो में हुई. साल 2003 में अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस की स्थापित की गई। जिसके बाद साल  2012 तक यह दुनिया भर में उन सभी जगहों पर फैल गया है, जहां गाजर के बारे में लोग जानते थे। बता दें, सबसे पहले गाजर दिवस को मनाने की शुरुआत फ्रांस और स्वीडन से हुई। इसके बाद भारत, जापान, रूस इटली समेत दुनिया के कई देशों में विश्व गाजर दिवस मनाया जाने लगा। गाजर दिवस को मनाने का मकसद देश के लोगों के बीच गाजर जैसे पौष्टिक आहारों के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाने का था। 

विश्व चूहा दिवस 
विश्व चूहा दिवस 2002 से 4 अप्रैल को मनाया जाता रहा है, जब चूहा प्रेमियों द्वारा इसे मनाने के लिए एक आंदोलन की शुरुआत की गई थी।इस दिन को मनाने का उद्देश्य है कि इंसान चूहों के प्रति अपनी नफरत को खत्म करे और उनके बारे में अच्छा सोचे. दरअसल, ब्यूबोनिक प्लेग के बाद से पूरी दुनिया में चूहों को नफरत की निगाहों से देखा गया. उन्हें बीमारी फैलाने वाला, खाना चुराने वाला, अनाज बर्बाद करने वाला एक गंदा जीव माना गया. लेकिन चूहे इससे कहीं बेहतर हैं. उनके अंतर कमाल की क्षमताएं हैं...यहां तक की कुछ लोग चूहों को पालते भी हैं और उन लोगों का मानना है कि चूहे बेहद बुद्धिमान और मनोरंजक साथी होते हैं. इंसानों को उनके प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है और इसके साथ ही उन्हें देखभाल और ढेर सारे प्यार की जरूरत है.एशिया में चूहों को यूरोप की तुलना में ज्यादा अनुकूल माना जाता है. यूरोप में जहां उन्हें अपशकुन के रूप में देखा जाता है, वहीं एशिया के भारत जैसे देश में उन्हें कई जगह पूजा जाता है. चूहा हिंदू धर्म के भगवान श्री गणेश का वाहन भी है. अब मूल सवाल पर आते हैं कि आखिर वर्ल्ड रैट डे मनाने की शुरुआत कब से हुई है. दरअसल, 2002 में कुछ लोगों के एक समूह ने चूहों को समर्पित एक दिन शुरू किया और उसी के बाद से 4 अप्रैल को वर्ल्ड रैट डे मनाया जाने लगा. (विविध स्रोत)


बुधवार, 2 अप्रैल 2025

3 अप्रैल


3 अप्रैल 
हिंदी रंगमंच दिवस 
हिंदी रंगमंच दिवस प्रतिवर्ष ३ अप्रैल को मनाया जाता है। तीन अप्रैल 1868 की शाम बनारस में पहली बार शीतलाप्रसाद त्रिपाठी कृत हिन्दी नाटक 'जानकी मंगल' का मंचन हुआ। जून 1967 में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में पहली बार इस नाटक के मंचन को प्रामाणिक तौर पर पुष्ट किया। इंग्लैंड के 'एलिन इंडियन मेल' के आठ मई 1868 के अंक में भी उस नाटक के मंचन की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी। इसी आधार पर पहली बार शरद नागर ने ही हिन्दी रंगमंच दिवस की घोषणा तीन अप्रैल को की थी। कुछ लोग इस मामले पर हस्तक्षेप करते हुए यह भी कहते हैं कि सन १८५३ में नेपाल के भाटगाँव में “विद्याविलाप “ नामक हिन्दी नाटक खेला गया था। जबकि कुछ लोगों का यह भी कहना हे कि सन 1850 से 1860 के बीच लखनऊ में “इंद्रसभा” और नवाब वाजिद अलीशाह के “किस्सा राधा कन्हैया” का मंचन हुआ था। बताते हैं कि उन्हीं दिनों मुंबई में सांगलीकर नाटक मंडली ने “ गोपीचन्दोपाख्यान “ (ओपेरा) का मंचन किया था। 

झारखंड वॉलीबॉल दिवस 
झारखंड वॉलीबॉल दिवस 3 अप्रैल को झारखंड के सभी जिलों में धूमधाम से मनाया जाता है। झारखंड वॉलीबॉल संघ से संबद्ध सभी जिला संघ, यूनिट एवं क्लबों द्वारा इस विशेष अवसर पर वॉलीबॉल प्रतियोगिता, प्रशिक्षण शिविर, कार्यशाला और सम्मान समारोह का आयोजन करते हैं। यह आयोजन झारखंड वॉलीबॉल संघ के पितामह कहलाने वाले शेखर बोस के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। रांची से करीब 70 किलोमीटर दूर जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे मैकलुस्कीगंज में 14 एकड़ में फैली गुलमोहर कोठी में पिछले 40 सालों से झारखंड में वॉलीबॉल के नर्सरी मैन कहे जाने वाले शेखर बोस वॉलीबॉल एकेडमी चलाते हैं। इस हॉस्टल के 10 से ज्यादा बच्चे सेना, पुलिस और दूसरी नौकरियों में पिछले दिनों सिलेक्ट हुए हैं। शेखर बोस ने 2000 में मैकलुस्कीगंज आकर कुछ पैसों से मैंने सेंटर शुरू किया। दो साल तक बच्चे इस सेंटर में रहते हैं। शुरूआत में काफी मुश्किलें आईं। लेकिन यहां की यह तस्वीर बदल गई। कभी यहां की कोठियों में यूरोपियन लोगों के क्लब हुआ करते थे। आज भी 20-22 एंग्लो इंडियन परिवार यहां रहते हैं। कभी वॉलीबॉल के मशहूर खिलाड़ी रहे शेखर दा की जिद थी कि यहां वॉलीबॉल एकेडमी खोलेंगे। शेखर ने अनंत कुमार चौधरी जैसे खिलाड़यों को लेकर गुलमोहर वॉलीबॉल एकेडमी शुरू की। एजी ऑफिस से नौकरी से रिटायर होने के बाद वे रांची यूनिवर्सिटी में वॉलीबॉल कोच बने। शेखर झारखंड वॉलीबॉल एसोसिएशन के महासचिव भी रहे।

राष्ट्रीय पैदल यात्रा दिवस 
हमारे पैरों को गतिशील रखने और स्वस्थ रहने में हमारी मदद करने के लिए, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) हर साल अप्रैल के पहले बुधवार को राष्ट्रीय पैदल चलने का दिन मनाता है ताकि सभी उम्र के लोगों को पैदल चलने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के तहत 2007 में राष्ट्रीय वॉकिंग दिवस की शुरुआत की। यह आयोजन हमारे दैनिक जीवन में अधिक शारीरिक गतिविधि को शामिल करने के लिए एक शानदार अनुस्मारक है। AHA स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों को भाग लेने के लिए सहायक संसाधन प्रदान करता है, जिसमें चलने की चुनौतियाँ, समूह में टहलना और चलने के लाभों पर शैक्षिक सामग्री शामिल है। राष्ट्रीय पैदल यात्रा दिवस हृदय को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली अपनाने के लिए एक आदर्श अवसर है - चाहे वह दोपहर के भोजन के दौरान तेज चलना हो, किसी स्थानीय पैदल चलने वाले समूह में शामिल होना हो, या व्यक्तिगत कदम लक्ष्य निर्धारित करना हो। प्रतिदिन 7,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य हृदय संबंधी फिटनेस बनाए रखने के लिए एक बेहतरीन लक्ष्य है, और दिन भर में थोड़ी-थोड़ी देर की सैर भी फर्क ला सकती है। (विविध स्रोत)

मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

2 अप्रैल


2 अप्रैल 
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 
(World Autism Awareness Day)
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (WAAD) हर साल 2 अप्रैल को मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) के बारे में जागरूकता, स्वीकृति और समझ को बढ़ाना है. WAAD प्रारंभिक निदान, सहायता और नीतियों को प्रोत्साहित करता है जो सुनिश्चित करते हैं कि ऑटिस्टिक व्यक्ति एक समावेशी समाज में पूर्ण जीवन जीते हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2007 में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस की शुरुआत की थी। इसका मकसद लोगों को ऑटिज्म के बारे में जागरूक करना और इसे बेहतर तरीके से समझने में मदद करना था. पहले यह दिन सिर्फ जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता था लेकिन अब इसका मकसद ऑटिज्म से जुड़े लोगों को स्वीकार करना, उन्हें समाज में जगह देना और उनके योगदान को पहचानना भी है. ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है जो सामाजिक संपर्क और व्यवहार को प्रभावित करती है. इसे स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण और गंभीरता व्यक्तियों में भिन्न होती है. ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है बल्कि दुनिया को अनुभव करने का एक अलग तरीका है. हालाँकि इसके सटीक कारण अज्ञात हैं.18 दिसंबर 2007 को आयोजित 76वीं पूर्ण बैठक में संयुक्त राष्ट्र ने 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के रूप में नामित किया, जिसे 2008 से हर साल मनाया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग और आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग, न्यूरोडाइवर्सिटी संस्थान (आईओएन) के सहयोग से, जो कि न्यूरोडाइवर्सिटी व्यक्तियों द्वारा न्यूरोडाइवर्सिटी व्यक्तियों और उनके सहयोगियों के लिए स्थापित और संचालित एक संगठन है, 2025 में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस का आयोजन करेंगे।न्यूरोडाइवर्सिटी एक शब्द है जिसे मूल रूप से ऑस्ट्रेलियाई समाजशास्त्री जूडी सिंगर ने 1990 के दशक के अंत में गढ़ा था, जिसमें विभिन्न लोगों के बीच लगभग अनंत न्यूरोकॉग्निटिव अंतर शामिल हैं। यह हर व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र में अंतर की पहचान करता है और जिसके द्वारा वे कौशल और जरूरतों का एक अलग सेट लाते हैं। ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिस्प्रैक्सिया, डिस्लेक्सिया, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर आदि के बीच विभिन्न न्यूरोमाइनॉरिटीज में से एक है।

मुक्ति दिवस अमेरिका 
2025 में अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को ‘मुक्ति दिवस’ के रूप में घोषित किया। इस दिन से उन्होंने विभिन्न देशों से आयातित वस्तुओं पर नए टैरिफ लागू करने का एलान किया। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया है, जिसका उद्देश्य देश को विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता से मुक्त करना और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इस घोषणा ने भारत सहित वैश्विक व्यापार, बाजारों और उपभोक्ताओं के बीच व्यापक चर्चा और अनिश्चितता पैदा कर दी है। इससे अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच पहले से ही जारी व्यापार युद्ध और गहराने की आशंका जताई जा रही है। ट्रंप ने 2 अप्रैल को "लिबरेशन डे" यानी 'मुक्ति दिवस' करार देते हुए कहा है कि उनकी नई टैरिफ नीति अमेरिका को विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता से मुक्त करेगी। उनके अनुसार, ये शुल्क उन करों के बराबर होंगे जो अन्य देश अमेरिकी उत्पादों पर लगाते हैं। हालांकि, इस नीति का कार्यान्वयन कैसे होगा, इस पर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। ट्रंप का मानना है कि यह कदम अमेरिका के व्यापार असंतुलन को ठीक करेगा और उन देशों को जवाब देगा जो अमेरिकी वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाते हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “दशकों से हम दुनिया के हर देश, दोस्त और दुश्मन दोनों, द्वारा लूटे गए हैं। अब समय आ गया है कि अमेरिका अपना पैसा और सम्मान वापस ले।”

राष्ट्रीय सुलह दिवस
अमेरिका में हर साल 2 अप्रैल को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय सुलह दिवस हमें उन रिश्तों को सुधारने के लिए प्रेरित करता है जिन्हें हमने शब्दों या कार्यों के माध्यम से खराब कर दिया है। जबकि दुनिया भर में कई अलग-अलग "सुलह दिवस" मनाए जाते हैं, यह विशेष रूप से 2 अप्रैल को मनाया जाता है। सुलह दिवस के कई संदर्भ हैं। हालांकि, कई लोग अखबार की स्तंभकार एन लैंडर्स को इसका श्रेय देते हैं, जिन्होंने 1989 में अपने पाठकों के एक पत्र के जवाब में, 2 अप्रैल को हर साल सुलह दिवस के रूप में प्रचारित करना शुरू किया। उन्होंने अपने पाठकों को अपने टूटे हुए रिश्तों को सुधारने के लिए प्रोत्साहित किया और 2 अप्रैल के प्रत्येक कॉलम को ऐसे ही रिश्तों से संबंधित पत्रों के लिए समर्पित किया। (विविध स्रोत)

सोमवार, 31 मार्च 2025

1 अप्रैल


1 अप्रैल 
हर साल अप्रैल का पहला दिन दुनिया भर में April Fools Day के रूप में मनाया जाता है। अप्रैल फूल डे मनाने के शुरुआत चॉसर के 'कैंटरबरी टेल्स' की एक कहानी 'नन्स प्रीस्ट्स टेल' में मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि इसकी शुरुआत 1381 में हुई थी। उस दौरान इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की घोषणा कर दी गई थी। राजा ने अपनी जनता को अपने और रानी की एनी की सगाई की डेट 32 मार्च बताई थी। वहां की जनता भी नहीं समझ पाई और राजा की बात पर विश्वास कर लिया। राजा के सगाई की खुशी में चारों तरफ उत्सव का माहौल बन गया था। बाजार सज चुके थे। लोग तैयारियों में जुटे हुए थे कि अचानक उन्हें एहसास हुआ कि 32 मार्च तो कैलेंडर में कोई तारीख ही नहीं होती है। इसके बाद सभी के समझ आया कि उन्हें बेवकूफ बनाया गया है। तब से अप्रैल फूल डे पूरे ब्रिटेन में फैल गया। इसी कहानी में, एक घमंडी मुर्गे को एक चालक लोमड़ी ने बेवकूफ बनाया था। स्कॉटलैंड में अप्रैल फूल्स डे दो दिनों तक चलता है, जहां शरारत करने वालों को गौक्स (कोयल पक्षी) कहा जाता है। अप्रैल फूल डे को ऑल फूल्स डे के रूप में भी जाना जाता है। 1539 में फ्लेमिश कवि एडवर्ड डे डेने ने एक ऐसे ऑफिसर के बारे में लिखा जिसने अपने नौकरों को एक बेवकूफी की यात्रा पर 1 अप्रैलको भेजा था। 1968 में इस दिन को जॉन औब्रे ने मूर्खों का छुट्टी का दिन कहा क्योंकि, 1 अप्रैल को बहुत से लोगों को बेवकूफ बनाकर, लंदन के टॉवर पर एकत्रित किया गया था। 

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत
भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च को खत्म होता है. इसका कारण ब्रिटिश शासन से जुड़ा है, जब ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश सरकार ने राजस्व और बजट प्रबंधन के लिए यह समयसीमा तय की थी, तब से वित्तीय वर्ष की शुरुआत इसी दिन से होती आ रही है. इसके पीछे कई मुख्य आर्थिक कारण थे, जैसे कृषि चक्र और कर संग्रह की सुविधा.

ओडिशा स्थापना दिवस 
यह ओडिशा राज्य के गठन का दिन भी है, जिसे 1936 में बिहार से अलग कर बनाया गया था.
ओडिशा राज्य का स्थापना दिवस है जिसे वहां के लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं. 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा को बिहार और संयुक्त प्रांत से अलग करके एक स्वतंत्र राज्य बनाया गया था. यह भारत का पहला राज्य था जिसे भाषा के आधार पर पुनर्गठित किया गया था. इस दिन को ‘उत्कल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है जो पूरे भारत में ओडिशा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है.ब्रिटिश शासन के दौरान, ओडिशा बंगाल प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था। बाद में इसे बिहार और उड़ीसा प्रांत के रूप में पुनर्गठित किया गया। लेकिन स्थानीय लोगों और समाज सुधारकों के लंबे संघर्ष के बाद, ओडिशा को एक अलग राज्य के रूप में मान्यता दी गई। 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा को एक स्वतंत्र प्रांत के रूप में स्थापित किया गया, जो भाषा के आधार पर भारत में बनने वाला पहला राज्य था। यही कारण है कि 1 अप्रैल को “उत्कल दिवस” या “ओडिशा दिवस” के रूप में ओडिशा स्थापना दिवस मनाया जाता है।प्राचीन काल में, यह क्षेत्र मौर्य, गुप्त, शुंग, और गजपति राजवंशों के अधीन था। विशेष रूप से, कलिंग साम्राज्य अपनी शक्ति और समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। ईसा पूर्व 261 में सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया, जिसे “कलिंग युद्ध” के नाम से जाना जाता है। इस भीषण युद्ध के बाद, अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा का मार्ग अपनाया।

सीबीआई स्थापना दिवस 
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), कार्मिक विभाग, कार्मिक, पेंशन और लोक शिकायत मंत्रालय के तहत एक प्रमुख जांच पुलिस एजेंसी है. यह भारत की आधिकारिक पुलिस एजेंसी है जो इंटरपोल के सदस्य देशों के लिए जांच का प्रबंधन करती है. सीबीआई की स्थापना 1 अप्रैल, 1963 को हुई थी. 1963 में भारत सरकार द्वारा CBI का गठन भारत की रक्षा से संबंधित गंभीर अपराधों, उच्च पदों पर भ्रष्टाचार, गंभीर धोखाधड़ी, ठगी व गबन और सामाजिक अपराधों (विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मुनाफाखोरी) के अन्वेषण हेतु किया गया। कुछ समय बाद CBI को चर्चित हत्याओं, अपहरण, विमान अपहरण, चरमपंथियों द्वारा किये गए अपराध जैसे अन्य अपराधों की जाँच का उत्तरदायित्व भी सौंपा जाने लगा। सीबीआई की स्थापना की सिफारिश भ्रष्टाचार रोकथाम पर संथानम समिति (1962-1964) द्वारा की गई थी। CBI को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 द्वारा अन्वेषण करने की शक्ति प्राप्त है। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (Delhi Special Police Establishment- DSPE Act), 1946 को लागू करके भारत सरकार के विभिन्न विभागों/संभागों में भ्रष्टाचार के आरोपों के अन्वेषण हेतु एक एजेंसी के रूप में इसकी औपचारिक शुरुआत की गई। इससे पहले, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वर्ष 1941 में ब्रिटिश भारत के युद्ध विभाग (Department of War) में एक विशेष पुलिस स्थापना (Special Police Establishment- SPE) का गठन किया गया था ताकि युद्ध से संबंधित खरीद मामलों में रिश्वत और भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की जा सके। सीबीआई के पहले निदेशक डी. पी. कोहली थे। डीपी कोहली ने 1963 में सीबीआई की स्थापना की थी. 1968 में अपनी सेवानिवृत्ति तक इसके पहले निदेशक के रूप में कार्य किया.उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, सीबीआई आज देश की एक प्रमुख जांच एजेंसी के रूप में विकसित हुई है, जो भ्रष्टाचार, वित्तीय अपराधों और साइबर अपराधों सहित विभिन्न प्रकार के मामलों की जांच करती है. यह इंटरपोल के लिए भारत का राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो भी है, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. (विविध स्रोत)

रविवार, 30 मार्च 2025

31 मार्च


31 मार्च 
अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर दृश्यता दिवस
ट्रांस डे ऑफ़ विज़िबिलिटी 
2009 से हर साल 31 मार्च को अंतरराष्ट्रीय ट्रांसजेंडर दृश्यता दिवस मनाया जाता है। यह ट्रांसजेंडर लोगों का जश्न मनाने और दुनिया भर में ट्रांसजेंडर लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले भेदभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में उनके योगदान का जश्न मनाने के लिए समर्पित है। पहला अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर दृश्यता दिवस 31 मार्च, 2009 को आयोजित किया गया था। तब से इसे अमेरिका स्थित युवा वकालत संगठन ट्रांस स्टूडेंट एजुकेशनल रिसोर्सेज द्वारा आगे बढ़ाया गया है । इस कार्यक्रम की शुरुआत 2009 में मिशिगन की ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता रेचल क्रैंडल क्रॉकर ने की थी ट्रांसजेंडर लोगों की LGBTQ+ मान्यता की कमी की प्रतिक्रिया के रूप में , इस निराशा का हवाला देते हुए कि एकमात्र प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर-केंद्रित दिन ट्रांसजेंडर डे ऑफ रिमेंबरेंस था , जो ट्रांसजेंडर लोगों की हत्याओं का शोक मनाता था, लेकिन ट्रांसजेंडर समुदाय के जीवित सदस्यों को स्वीकार नहीं करता था और उनका जश्न नहीं मनाता था। राष्ट्रपति बराक ओबामा और उपराष्ट्रपति बिडेन ने पहली बार ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए इस दिन को स्वीकार किया; हालांकि, उस समय कोई घोषणा नहीं की गई थी। 2021 में, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने 31 मार्च को ट्रांसजेंडर विजिबिलिटी डे के रूप में घोषित किया। लेकिन, 2024 में दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने डॉनल्ड ट्रंप ने अपने देश में तीसरा जेंडर खत्म करने का एलान कर दिया।

एफिल टॉवर दिवस 
हर साल 31 मार्च को एफिल टावर दिवस मनाया जाता है। यह दिन फ्रेंच इतिहास और संस्कृति में एक महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि 31 मार्च 1889 को ही एफिल टॉवर का आधिकारिक उद्घाटन हुआ था। यह दिन हमें इस अद्भुत मीनार के इतिहास और महत्व को याद करने का अवसर प्रदान करता है। इसके साथ ही यह दिन हमें पेरिस और फ्रांस की संस्कृति और विरासत का अभिनंदन का भी अवसर देता है। 31 मार्च 1889 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज है क्योंकि इस दिन एफिल टावर का भव्य उद्घाटन हुआ था। इस टॉवर के उद्घाटन में लगभग 200,000 से अधिक लोग उपस्थित थे। इसके बाद यह पेरिस और फ्रांस का एक प्रतिष्ठित प्रतीक बन गया। (विविध स्रोत)