जूते का रंग और आदमी का ढंग
जूता आदमी के पैरों में जरूर होता है, लेकिन उसकी कहानी अक्सर सिर तक जाती है। आदमी क्या पहनता है, यह जितना महत्वपूर्ण है, उससे कम महत्वपूर्ण यह नहीं कि वह पैरों में क्या पहनता है। कपड़े देखकर आदमी की हैसियत का अनुमान लगाने में कुछ समय लग सकता है, मगर जूते पर नजर पड़ते ही कई बार फैसला तुरंत हो जाता है। चमचमाता काला जूता कहता है—“जनाब, आज ऑफिस जाना है।” सफेद स्नीकर्स कहते हैं—“ऑफिस हो या कॉफी शॉप, हम कहीं भी चल सकते हैं।” और लाल, नीले, पीले या किसी चटख रंग का जूता मुस्कराकर कहता है—“भाई साहब, जिंदगी बहुत गंभीर मत बनाइए!”
जूते की दुनिया में रंग केवल रंग नहीं है, वह एक सामाजिक बयान है। काला जूता सबसे पुराना भरोसेमंद दोस्त है। वह शादी में भी चला जाता है, दफ्तर में भी, इंटरव्यू में भी और शोकसभा में भी। उसे किसी परिचय की जरूरत नहीं पड़ती। काले जूते की यही खूबी है कि वह अवसर देखकर अपना चरित्र नहीं बदलता। वह आदमी को गंभीर, व्यवस्थित और थोड़ा-सा जिम्मेदार दिखाता है—भले ही उसके भीतर जिम्मेदारी का कोई सामान न हो! शायद इसी कारण formal और office footwear में काले जूते की मांग हमेशा मजबूत रही है।
फिर आता है सफेद जूता। सफेद जूते का मामला कुछ अलग है। यह जूता पहनना आसान है, मगर उसे साफ रखना कठिन। सफेद जूता खरीदते समय आदमी को लगता है कि उसने फैशन खरीद लिया है; दो सप्ताह बाद उसे पता चलता है कि उसने दरअसल सफाई की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी खरीद ली है। फिर भी sneakers और casual footwear में सफेद रंग का आकर्षण लगातार बना हुआ है। सफेद जूता युवा पीढ़ी को यह सुविधा देता है कि वह उसे जींस के साथ पहन सकती है, ट्रैक पैंट के साथ पहन सकती है और कभी-कभी कुर्ते के साथ भी—बस पहनने वाले में आत्मविश्वास होना चाहिए।
रंगीन जूते इस पूरी कहानी के सबसे बिंदास पात्र हैं। लाल, नीला, हरा, पीला, नारंगी—ये जूते आदमी से पूछते नहीं कि “आपकी उम्र क्या है?” वे सीधे कहते हैं—“आपकी पसंद क्या है?” खेल के मैदान से लेकर जिम और सड़क तक रंगीन sneakers ने जूते को महज उपयोग की वस्तु से fashion statement बना दिया है। हालांकि कुल बिक्री में चटख रंगों का हिस्सा काले या सफेद जैसे सार्वभौमिक रंगों जितना बड़ा नहीं होता, लेकिन fashion और sports footwear में इनकी अपनी जगह है।
लेकिन जूते की असली राजनीति रंग से भी आगे जाती है। सवाल यह भी है कि जूता किस तरह का है? Leather, formal, casual या sports? यहां एक मजेदार भ्रम दूर करना जरूरी है—लेदर और formal एक ही चीज नहीं हैं। लेदर जूते का मटीरियल हो सकता है और formal जूता उसका स्टाइल या उपयोग। यानी लेदर का जूता formal हो सकता है, casual भी हो सकता है और आजकल तो leather sneakers भी बाजार में हैं। जूते की दुनिया ने इतनी प्रगति कर ली है कि अब वह खुद अपनी पहचान को लेकर कन्फ्यूज हो सकता है!
एक समय था जब जूते का मतलब लगभग formal shoe ही माना जाता था। काला या भूरा चमड़े का जूता, पालिश की चमक और उसके ऊपर आदमी की गंभीरता—बस यही पैकेज था। जूता जितना चमकदार, आदमी उतना व्यवस्थित। मगर फिर खेल के जूते ने मैदान छोड़कर बाजार पर कब्जा करना शुरू किया। Sports shoes अब केवल खेल के लिए नहीं हैं। वे टहलने के लिए हैं, यात्रा के लिए हैं, बाजार जाने के लिए हैं, जिम के लिए हैं और कई लोगों के लिए तो शादी-ब्याह में भी धीरे-धीरे प्रवेश कर रहे हैं।
यही कारण है कि आज footwear market में sports shoes और sneakers का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह केवल खेल के प्रति बढ़ती रुचि नहीं है। असली कारण है comfort का बढ़ता महत्व। आधुनिक आदमी ने शायद पहली बार यह समझना शुरू किया है कि सुंदर दिखने के लिए पैरों को सजा देना और पैरों को आराम देना दो अलग-अलग बातें हैं। पहले वह जूते को पहनता था; अब वह जूते से पूछता है—“तुम मुझे कितना आराम दोगे?”
जूते की इस नई दुनिया में athleisure ने बड़ा खेल किया है। यानी खेलों के लिए बने कपड़े और जूते अब रोजमर्रा के fashion का हिस्सा बन गए हैं। जिस sports shoe को कभी मैदान में पहनना जरूरी समझा जाता था, वही अब मेट्रो में, मॉल में, हवाई अड्डे पर और कॉफी की दुकान में दिखाई देता है। जूता कह रहा है—“मैं खिलाड़ी नहीं हूं, मगर खिलाड़ी जैसा दिखना मुझे पसंद है।” और आदमी भी खुश है, क्योंकि उसे फैशन और आराम दोनों एक ही पैकेज में मिल रहे हैं।
बाजार की दृष्टि से देखें तो non-athletic footwear अभी भी बड़ा बाजार है, लेकिन sports और athletic footwear की वृद्धि उल्लेखनीय है। यही वजह है कि आने वाले समय में जूतों की अलमारी में formal shoes की संख्या कम और sneakers की संख्या अधिक दिखाई दे सकती है। एक आदमी के पास एक अच्छा काला formal shoe और एक अच्छा brown shoe काफी समय तक काम चला सकता है, लेकिन sneakers के मामले में एक पर मामला नहीं रुकता—एक सफेद चाहिए, एक black चाहिए, एक walking के लिए, एक gym के लिए और एक ऐसा भी जो देखकर लगे कि “भाई, यह बहुत महंगा है”, भले ही वह सेल में खरीदा गया हो!
दिलचस्प बात यह है कि काला जूता अभी भी हारा नहीं है। वह बाजार का पुराना खिलाड़ी है। सफेद और रंगीन जूते फैशन की नई पीढ़ी हैं, sports shoes नई अर्थव्यवस्था के सितारे हैं, मगर काला formal shoe अब भी इंटरव्यू, दफ्तर, स्कूल, समारोह और औपचारिक अवसरों का विश्वसनीय साथी बना हुआ है। भूरा भी उसके साथ मजबूती से खड़ा है। इसलिए जूते की दुनिया में कोई एक रंग या एक शैली सबको पूरी तरह पछाड़ नहीं रही; हर रंग और हर जूते ने अपनी-अपनी दुनिया बना रखी है।
शायद इसीलिए जूते को केवल पैर ढकने की चीज मानना उसके साथ अन्याय है। काला जूता आदमी की गंभीरता है, सफेद जूता उसकी नफासत, रंगीन जूता उसका उत्साह और sports shoe उसकी सुविधा। चमड़े का जूता परंपरा की याद दिलाता है और sneaker कहता है कि परंपरा अच्छी है, मगर चलना भी तो है!
आखिर जूता है ही चलने के लिए। मगर आदमी ने उसे भी अपनी तरह बना लिया—अब वह सिर्फ चलता नहीं, स्टाइल में चलता है। उसके कदमों की आवाज से ज्यादा उसके जूते का रंग बोलता है। काला जूता कहता है—“काम कीजिए।” सफेद कहता है—“स्टाइल से कीजिए।” रंगीन जूता कहता है—“अपने मन से कीजिए।” और sports shoe शायद सबसे समझदार है—वह कहता है, “जो करना है कीजिए, बस आराम से कीजिए।”
इसलिए जूते की दुकान में रंगों और डिजाइनों की जितनी भीड़ दिखाई देती है, उसके पीछे असल में आदमी की बदलती हुई जिंदगी खड़ी है। पहले जूता जरूरत था, फिर पहनावा बना, फिर फैशन बना और अब पहचान का हिस्सा है। आदमी के पैर भले जमीन पर चलते हों, मगर जूता अब उसके व्यक्तित्व, उसकी पसंद और उसकी जीवनशैली की कहानी भी साथ लेकर चलता है। और शायद इसीलिए आज किसी आदमी के जूते देखकर यह अंदाजा लगाना आसान है कि वह किधर जा रहा है, लेकिन यह पता लगाना थोड़ा मुश्किल है कि वास्तव में जाना कहां चाहता है!

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