सोमवार, 7 सितंबर 2026

निठल्ले के नोट्स - उपनाम में क्या रखा है

नाम के पीछे छिपा नाम

सरनेम की कहानी : आदमी से खानदान तक

कहते हैं—नाम में क्या रखा है?

शेक्सपियर के रोमियो ने पूछा था कि नाम में आखिर रखा ही क्या है। लेकिन अगर रोमियो भारत में पैदा हुआ होता तो शायद उसके सामने अगला सवाल होता—“अच्छा, रोमियो तो ठीक है, लेकिन सरनेम क्या है?” और अगर वह किसी भारतीय सरकारी फॉर्म के सामने बैठा होता तो मामला और गंभीर हो जाता—“First Name”, “Middle Name”, “Last Name” और फिर कभी-कभी “Father’s Name” भी!

मनुष्य को केवल “राम” कह देने से काम चल सकता था, लेकिन जैसे-जैसे रामों की संख्या बढ़ी, पहचान की समस्या पैदा हुई। एक गाँव में पाँच राम हों तो पुकारिए—“राम!” पाँचों मुड़कर देखने लगेंगे। तब किसी राम को उसके पिता से जोड़ना पड़ा—राम, दशरथ का बेटा। किसी को उसके काम से पहचानना पड़ा—राम लोहार। किसी को गाँव से—राम बनारसी। किसी को रंग-रूप से—राम काला, राम गोरा। किसी को घर या खेत से—राम पहाड़ी, राम नदीवाला। और किसी को उसके खानदान से—राम फलाँ परिवार का।

यहीं से मनुष्य की पहचान में एक अतिरिक्त नाम प्रवेश करता गया—सरनेम।

‘सरनेम’ आखिर है क्या?

अंग्रेज़ी का surname स्वयं एक दिलचस्प शब्द है। इसका प्रारंभिक अर्थ आज के “परिवार के नाम” जैसा स्थिर नहीं था। मध्य अंग्रेज़ी में यह फ्रांसीसी surnom से आया, जिसका संबंध पुराने फ्रांसीसी surnom और लैटिन supernomen से माना जाता है—अर्थात् मूल नाम के ऊपर लगाया गया अतिरिक्त नाम। बाद में यही अतिरिक्त नाम धीरे-धीरे वंशानुगत पारिवारिक नाम बन गया। अंग्रेज़ी में surname का प्रयोग 14वीं शताब्दी से मिलता है। 

इसलिए सरनेम की मूल कहानी “परिवार” से कम और पहचान को स्पष्ट करने की आवश्यकता से अधिक जुड़ी हुई है।

मध्ययुगीन यूरोप में जब आबादी बढ़ी, शहर बड़े हुए, व्यापार फैला और एक ही नाम वाले लोगों की संख्या बढ़ी, तब केवल व्यक्तिगत नाम पर्याप्त नहीं रह गया। किसी जॉन को दूसरे जॉन से अलग करना था। अतः कोई John the Smith हुआ, कोई John of York, कोई John son of William और कोई John Brown.

धीरे-धीरे ये अस्थायी पहचानें स्थायी होने लगीं। इंग्लैंड में नॉर्मन अभिजात वर्ग में वंशानुगत उपनाम 12वीं शताब्दी तक दिखाई देने लगते हैं और आम लोगों में 13वीं-14वीं शताब्दी में उनका प्रसार तेज हुआ। 

अर्थात् सरनेम की पैदाइश में रोमांस से ज्यादा प्रशासन की मजबूरी थी।

राजा को कर वसूलना था, चर्च को जन्म-मृत्यु का हिसाब रखना था, अदालत को व्यक्ति पहचानना था और व्यापारी को यह जानना था कि उधार किस जॉन को दिया गया था। मनुष्य ने परिवार की स्मृति से पहले शायद कागज़ की जरूरत महसूस की!

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सरनेम कितने प्रकार के होते हैं?

इस प्रश्न का सबसे ईमानदार उत्तर है—इसकी कोई एक निश्चित संख्या नहीं है।

भाषाविज्ञान और नामविज्ञान में सरनेमों को उनकी उत्पत्ति के आधार पर सामान्यतः कुछ प्रमुख वर्गों में रखा जाता है। अलग-अलग विद्वान इन्हें पाँच, छह, सात, आठ या उससे अधिक श्रेणियों में बाँट सकते हैं, क्योंकि एक ही सरनेम एक से अधिक श्रेणियों में आ सकता है।

व्यावहारिक रूप से दुनिया भर के सरनेमों की कहानी को लगभग आठ प्रमुख स्रोतों में समझा जा सकता है—

1. पितृनामिक (Patronymic) — पिता या पुरुष पूर्वज के नाम से
2. मातृनामिक (Matronymic) — माता या महिला पूर्वज के नाम से
3. व्यावसायिक (Occupational) — पेशे से
4. स्थानवाचक/भौगोलिक (Toponymic/Habitational) — स्थान, गाँव, नगर या भू-दृश्य से
5. वर्णनात्मक/उपनामजन्य (Descriptive/Nickname) — रंग, रूप, स्वभाव या किसी विशेषता से
6. वंश, कुल, कबीले या घराने से जुड़े नाम
7. पद, उपाधि, धार्मिक या सामाजिक पहचान से बने नाम
8. प्रशासनिक, प्रवासी, धर्मांतरण अथवा स्वयं चुने गए आधुनिक पारिवारिक नाम

इन श्रेणियों को लोहे की पेटियों की तरह अलग-अलग बंद नहीं किया जा सकता। एक नाम एक साथ स्थानवाचक भी हो सकता है और वंशवाचक भी।

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सबसे पुराना रास्ता—“फलाँ का बेटा”

सरनेम की दुनिया में सबसे स्वाभाविक रास्ता है—पिता का नाम।

इसे patronymic कहते हैं। Oxford के अनुसार patronymic वह नाम है जो पिता या किसी पुरुष पूर्वज के नाम से बनाया जाता है। 

दुनिया की अनेक भाषाओं में इसके अद्भुत रूप मिलते हैं।

अंग्रेज़ी में Johnson का अर्थ मूलतः “John का पुत्र”, Williams यानी William का पुत्र, Roberts यानी Robert का पुत्र जैसी संरचनाओं से जुड़ा है।

स्कॉटिश नामों में MacDonald का Mac “son of” से जुड़ा है। आयरिश नामों में O’Brien का O’ वंशज या “descendant of” का संकेत देता है। 

रूसी और अन्य स्लाव भाषाओं में -ov, -ev, -ovich जैसे रूप पितृवंश से जुड़े हैं; -ova/-eva जैसे रूप कई भाषाओं में स्त्री रूप बनाते हैं।

आइसलैंड में तो यह परंपरा आज भी इतनी जीवित है कि पारंपरिक नाम व्यवस्था में व्यक्ति का अंतिम नाम परिवार की स्थायी विरासत न होकर पिता या माता के नाम से बन सकता है—अर्थात् आज का “फलाँसन” जरूरी नहीं कि उसके बेटे का भी वही सरनेम हो।

यानी कुछ समाजों में सरनेम का अर्थ था—“तुम किसके बेटे हो?”

और यह प्रश्न मानव सभ्यता जितना ही पुराना है।

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फिर आई माँ की बारी

यदि पिता से बना नाम patronymic है तो माँ से बना नाम matronymic कहलाता है।

ऐसे नाम दुनिया में कम हैं, लेकिन अनुपस्थित नहीं। कुछ समाजों में मातृवंशीय परंपराओं ने नामकरण को प्रभावित किया। यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक पश्चिमी समाज में सरनेम को प्रायः पिता से आने वाली स्थायी चीज़ समझ लिया जाता है, जबकि मानव समाजों में नाम की विरासत हमेशा इतनी एकरेखीय नहीं रही।

भारत में भी नामकरण को केवल “पिता का नाम + परिवार का नाम” समझना भारी सरलीकरण होगा। विशेषकर दक्षिण भारत में व्यक्तिगत नाम, पिता का नाम, स्थान और कभी-कभी समुदाय/जाति-सूचक नाम अलग-अलग क्रमों में प्रयुक्त हुए हैं। नामों की यह विविधता अकादमिक साहित्य में भी दर्ज है। 

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जब पेशा ही खानदान बन गया

अब आते हैं सरनेमों की शायद सबसे मजेदार श्रेणी पर—पेशा।

किसी के पूर्वज लोहार थे तो वह परिवार Smith हो गया। कोई Baker था तो Baker। कोई Miller था तो Miller। Fisher, Carpenter, Cooper, Taylor, Weaver, Wright जैसे अंग्रेज़ी नामों में पेशे का इतिहास सुनाई देता है।

जर्मन में Schmidt लोहार से संबंधित है, Schneider दर्जी से। यूरोप की अनेक भाषाओं में इसी तरह के पेशागत नाम मिलते हैं।

कल्पना कीजिए, किसी मध्ययुगीन गाँव में चार जॉन रहते हैं—

एक जॉन लोहार है, दूसरा जॉन आटा पीसता है, तीसरा जॉन कपड़ा बुनता है और चौथा जॉन जंगल के किनारे रहता है।

सरकारी बाबू ने शायद लिखा होगा—

John Smith
John Miller
John Weaver
John Wood

बाबू ने सोचा होगा कि आज काम चल गया। उसे क्या पता था कि उसके लिखे ये शब्द अगले आठ सौ साल तक वंशावली के साथ चलते रहेंगे!

अंग्रेज़ी surname Webster का ऐतिहासिक संबंध cloth-weaver अर्थात बुनकर के पेशे से बताया जाता है। 

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फिर आदमी अपने गाँव का हो गया

दुनिया भर में सरनेमों का एक बड़ा स्रोत स्थान रहा है।

जो व्यक्ति किसी जगह से आया, वह उस जगह का हो गया।

इसलिए यूरोपीय परंपरा में London, York, Kent, Hill, Wood, Brook जैसे नाम दिखाई देते हैं। de, von, van, da, del जैसे शब्द भी कई स्थानवाचक नामों में दिखाई देते हैं—अर्थात् “फलाँ स्थान का/से”।

Leonardo da Vinci इसका प्रसिद्ध उदाहरण है। “da Vinci” मूलतः Vinci नामक स्थान से संबंध बताता है। यहाँ “Vinci” कोई पेशा नहीं, एक स्थान है। 

यही वह बिंदु है जहाँ सरनेम इतिहास का नक्शा बन जाता है।

किसी परिवार के नाम को पढ़िए और कभी-कभी आपको उसके पुरखे का घर, खेत, नदी, पहाड़ या गाँव मिल जाएगा।

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भारत : जहाँ सरनेम एक नाम नहीं, सामाजिक इतिहास है

यदि सरनेमों की दुनिया का कोई देश नामकरण का “महाकुंभ” है तो वह भारत है।

भारत में एक ही सार्वभौमिक surname system नहीं है। यहाँ नाम भाषा, क्षेत्र, धर्म, जाति-जति, गोत्र, कुल, पेशा, गाँव, उपाधि, पिता या पूर्वज और पारिवारिक परंपरा—सबसे प्रभावित होते हैं। समाजशास्त्रीय अध्ययनों ने भी भारतीय नामकरण को धर्म, वर्ण, जाति, गोत्र और वंश जैसी सामाजिक संरचनाओं से गहराई से जुड़ा पाया है। 

यही कारण है कि “भारतीय सरनेम कितने हैं?” पूछना कुछ वैसा है जैसे पूछना—“भारत में कितने लोकगीत हैं?”

एक अंतिम, सर्वमान्य संख्या बताना संभव नहीं है।

भारत की कोई ऐसी राष्ट्रीय आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं है जिसमें देश के हर प्रचलित सरनेम की अंतिम गणना हो। ऊपर से एक ही नाम अलग-अलग समुदायों और प्रदेशों में अलग अर्थ रख सकता है, और एक ही परिवार का नाम अलग-अलग वर्तनी में लिखा जा सकता है।

भारतीय नामों के कुछ प्रमुख स्रोत देखें—

1. स्थान

बनारसी, कश्मीरी, मदुरै जैसे स्थान-संबंधी नाम, या महाराष्ट्र-गोवा क्षेत्र में -कर वाले नामों की लंबी परंपरा मिलती है।

तेंदुलकर, गडकरी, मंगेशकर, पारकर जैसे नामों में स्थान-संबंधी संरचनाएँ दिखाई देती हैं।

2. पेशा

सोनार, लोहार, कुम्हार, बढ़ई, दर्जी, नाई, तेली, धोबी जैसे शब्द ऐतिहासिक रूप से पेशागत पहचान से जुड़े रहे हैं और कई जगह पारिवारिक नाम के रूप में भी प्रयुक्त हुए।

3. जाति/समुदाय

भारत में अनेक उपनाम सामाजिक समुदाय या जातीय पहचान से जुड़े रहे हैं। शर्मा, वर्मा, गुप्ता, यादव, जाट, नायर, रेड्डी, नायडू, पटेल आदि नामों की सामाजिक यात्रा एक जैसी नहीं है; अलग-अलग क्षेत्रों में इनके अर्थ और सामाजिक उपयोग बदलते रहे हैं।

इसलिए किसी सरनेम को देखकर सीधे किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि तय कर देना वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित तरीका नहीं है।

4. गोत्र और कुल

भारतीय परंपरा में गोत्र, प्रवर, कुल, वंश और उपनाम हमेशा एक ही चीज़ नहीं हैं।

यही फर्क अक्सर आधुनिक कागज़ी व्यवस्था में गड्डमड्ड हो जाता है।

5. उपाधि

कभी कोई पद ही परिवार का नाम बन गया।

राय, राव, चौधरी, ठाकुर, दीवान, खान, मलिक जैसे शब्द विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों में पद, सम्मान, सामाजिक पहचान या पारिवारिक नाम के रूप में इस्तेमाल हुए हैं। किसी एक शब्द का अर्थ पूरे भारत में एक जैसा मान लेना इतिहास के साथ अन्याय होगा।

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भारत में “सरनेम” की एक और दिलचस्प समस्या

भारत के दक्षिणी हिस्सों में लंबे समय तक नाम की संरचना उत्तर भारत या पश्चिमी देशों जैसी नहीं रही।

कई दक्षिण भारतीय नामों में स्थान का नाम + पिता का नाम + व्यक्ति का नाम या अन्य संयोजन मिलते हैं। बाद में पासपोर्ट, स्कूल प्रमाणपत्र, नौकरी और वैश्विक यात्रा जैसी प्रशासनिक आवश्यकताओं ने इन नामों को “First Name–Middle Name–Surname” के पश्चिमी खाने में फिट करने की मजबूरी पैदा की।

यानी कई बार सरनेम परंपरा से कम और फॉर्म की मजबूरी से अधिक स्थायी हुआ।

एक व्यक्ति के नाम में जो अंतिम शब्द आज surname दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि वह उसके परिवार का सदियों पुराना hereditary surname ही हो।

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और फिर एक नाम ने जाति की दीवार पर चोट की—सिंह और कौर

भारतीय सरनेम इतिहास का एक असाधारण अध्याय सिख परंपरा में मिलता है।

1699 में गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा परंपरा की स्थापना के साथ पुरुषों के लिए Singh और महिलाओं के लिए Kaur के प्रयोग को विशेष धार्मिक-सामुदायिक महत्व मिला। Singh संस्कृत siṃha अर्थात “सिंह/शेर” से जुड़ा है। Kaur को सामान्यतः “राजकुमारी” के अर्थ में समझाया जाता है। 

यहाँ नाम की भूमिका केवल पहचान बताने की नहीं थी; वह समानता का सामाजिक वक्तव्य भी बन गया।

दिलचस्प बात यह कि Singh शब्द सिख परंपरा से पहले भी उत्तर भारत में, विशेषकर राजपूतों के बीच, प्रतिष्ठित नाम/उपाधि के रूप में प्रचलित था। अतः “Singh केवल सिखों का सरनेम है” कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा। 

और आधुनिक समय में Singh तथा Kaur हमेशा पारिवारिक surname की तरह ही काम करें, यह भी आवश्यक नहीं; कई सिखों के नाम में वे middle/religious name की भूमिका निभाते हैं। 

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चीन : जहाँ “सरनेम पहले” आता है

दुनिया की नाम-व्यवस्थाओं में चीन खासा दिलचस्प है।

चीनी नामों में सामान्यतः surname पहले और given name बाद में आता है।

अर्थात् जहाँ हम कहते हैं—

Rahul Gandhi

वहाँ चीनी संरचना में परिवार का नाम पहले आ सकता है।

चीन में सरनेमों की एक और अद्भुत विशेषता है—बहुत बड़ी आबादी बहुत कम संख्या के प्रमुख surnames में सिमटी हुई है।

चीनी Hundred Family Surnames यानी 百家姓 (Bǎijiāxìng) नामक प्रसिद्ध Song-period ग्रंथ में 504 surname entries थीं—444 एक-अक्षरी और 60 दो-अक्षरी। उसका नाम “Hundred” है, लेकिन उसमें वास्तव में 100 से कहीं अधिक नाम हैं। 

आधुनिक चीन में भी कुछ नामों की असाधारण व्यापकता दिखाई देती है। उपलब्ध चीनी सरकारी आँकड़ों पर आधारित सूचियों में Wang, Li, Zhang, Liu और Chen सबसे बड़े surname समूहों में हैं। 2019 के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के नाम-सांख्यिकी में Wang और Li दोनों 100 मिलियन से अधिक लोगों के surname थे। 

यानी चीन में अगर किसी कक्षा में तीन बच्चे Wang निकले तो शिक्षक को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

भारत में “शर्मा जी कौन?” पूछना पड़ सकता है; चीन में “Wang कौन?” पूछने पर समस्या और बड़ी हो सकती है!

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जापान : जब सरकार ने कहा—अब सबका सरनेम होगा!

जापान की कहानी और भी रोचक है।

पूर्व-आधुनिक जापान में पारिवारिक नाम सामाजिक रूप से सभी लोगों के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं थे। विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों—विशेषकर समुराई और अभिजात समूहों—में family names का महत्व था। मेइजी काल में स्थिति बदली और सभी लोगों को पारिवारिक नाम अपनाने की दिशा में कानूनन आगे बढ़ाया गया। जापानी राष्ट्रीय पुस्तकालय के एक ऐतिहासिक विवरण में इस परिवर्तन को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। 

इसीलिए जापान में बहुत बड़ी संख्या में अलग-अलग surnames विकसित हुए। बहुत से नाम स्थानीय भू-दृश्य से जुड़े हैं—पहाड़, नदी, खेत, जंगल, पुल आदि से संबंधित अर्थों वाले नाम वहाँ आम हैं।

यानी किसी जापानी surname को पढ़ते हुए कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे सामने व्यक्ति नहीं, पूरा नक्शा खड़ा हो।

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यूरोप ने भी अपनी-अपनी स्मृतियाँ बाँध लीं

ब्रिटेन में Smith, Jones, Taylor, Brown, Williams जैसे नाम आज अत्यंत सामान्य हैं। अंग्रेज़ी surname tradition पर Oxford की व्यापक शोधपरंपरा 45,000 से अधिक English, Scottish, Welsh, Irish, Cornish और immigrant surnames का दस्तावेजीकरण करती है। 

अमेरिका में तस्वीर और भी बड़ी हो चुकी है।

2020 Census में अमेरिकी जनगणना ब्यूरो ने लगभग 7.8 million अलग-अलग last names दर्ज किए, जबकि कच्चे आंकड़ों में लगभग 9.4 million unique last names दिखाई दिए थे; सफाई और संपादन के बाद 7,765,578 अलग last names रह गए। इनमें 7.6 million से अधिक नाम 100 से कम लोगों के थे। 

और यह संख्या हमें एक महत्वपूर्ण बात सिखाती है—

सरनेमों की संख्या गिनना उतना आसान नहीं जितना लोगों की संख्या गिनना।

एक ही नाम की अलग spelling, transcription error, immigrant spelling, hyphenated surname, married surname और regional variation अलग-अलग entries बना सकते हैं।

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तो दुनिया में कुल कितने सरनेम हैं?

अब उस सवाल पर लौटें जिससे यह यात्रा शुरू हुई थी।

दुनिया में कुल कितने सरनेम हैं?

इसका कोई आधिकारिक वैश्विक उत्तर नहीं है।

लेकिन surname-distribution database Forebears ने अपनी विशाल वैश्विक database में करोड़ों surname forms दर्ज किए हैं। उसके अनुसार 2018 के एक संस्करण में लगभग 26.45 million surnames थे और बाद के database में लगभग 27.2 million surnames तक का coverage बताया गया। वर्तमान वेबसाइट लगभग 30.6 million unique surnames का दावा करती है।

लेकिन इन संख्याओं को “दुनिया में इतने ही सरनेम हैं” कहना ठीक नहीं होगा। यह database में दर्ज surname forms की संख्या है, न कि पृथ्वी पर मौजूद hereditary family names की कोई अंतिम वैज्ञानिक जनगणना।

अमेरिका के 2020 Census का लगभग 7.8 million वाला आंकड़ा भी यह दिखाता है कि एक देश के भीतर ही spelling और नाम-रूपों की विविधता कितनी विशाल हो सकती है। 

इसलिए सबसे सुरक्षित निष्कर्ष है—

«दुनिया में सरनेमों की कोई सर्वमान्य कुल संख्या नहीं है; उपलब्ध वैश्विक databases में करोड़ों अलग surname forms दर्ज हैं।»

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सरनेम केवल पहचान नहीं, इतिहास की छोटी-सी पांडुलिपि है

किसी का surname पढ़ते समय हम अक्सर केवल यह देखते हैं कि नाम क्या है।

लेकिन नामविज्ञान उसे दूसरी तरह पढ़ता है।

Smith कहता है—मेरे पुरखे शायद धातु के काम से जुड़े थे।
Johnson कहता है—किसी जॉन से रिश्ता था।
London या किसी अन्य स्थानवाचक नाम का अर्थ हो सकता है—कभी इस परिवार का संबंध उस जगह से था।
MacDonald पिता की ओर इशारा कर सकता है।
O’Brien वंश की ओर।
Singh/Kaur धार्मिक-सामुदायिक पहचान की ओर।
कई भारतीय उपनाम गाँव, कुल, पेशा, सामाजिक समूह या किसी पुराने पद की स्मृति सँजो सकते हैं।
चीनी surnames कभी प्राचीन राज्य, वंश या ऐतिहासिक कुल की याद बन जाते हैं।

इस अर्थ में सरनेम मानव सभ्यता की सबसे छोटी इतिहास-पुस्तक है।

एक शब्द—और उसके भीतर कई पीढ़ियाँ।

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मगर सरनेम हमेशा सच नहीं बोलता

यह भी याद रखना चाहिए कि surname कोई डीएनए रिपोर्ट नहीं है।

एक ही surname कई असंबद्ध परिवारों में पैदा हो सकता है। एक परिवार अपना surname बदल सकता है। प्रवास के दौरान spelling बदल सकती है। औपनिवेशिक प्रशासन नाम को अपनी सुविधा से लिख सकता है। विवाह के बाद नाम बदल सकता है। धर्म या सामाजिक पहचान बदलने पर surname बदला जा सकता है। कभी सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए नया surname अपनाया गया, तो कभी भेदभाव से बचने के लिए पुराना surname छोड़ दिया गया।

इसलिए किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, क्षेत्र या वंश केवल surname देखकर निश्चित कर देना इतिहास नहीं, नाम देखकर अनुमान लगाना है।

नाम संकेत दे सकता है; प्रमाण नहीं।

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“नाम में क्या रखा है?”—बहुत कुछ!

अब Shakespeare के सवाल पर लौटें।

नाम में क्या रखा है?

एक आदमी।

सरनेम में?

उस आदमी के पीछे खड़ा हुआ समय।

उसके पिता का नाम हो सकता है, माँ की स्मृति हो सकती है, पुरखे का पेशा, किसी भूले हुए गाँव की मिट्टी, किसी नदी का किनारा, किसी राजा की दी हुई उपाधि, किसी समुदाय की पहचान, किसी धार्मिक आंदोलन की घोषणा, किसी प्रवासी की नई जमीन, किसी प्रशासनिक अधिकारी की लिखावट और कभी-कभी किसी पूर्वज का वह उपनाम भी, जो उसने शायद हँसी-मजाक में सुना था।

फिर वह शब्द उसके बेटे के नाम में आया।

बेटे से पोते में।

पोते से परपोते में।

और देखते-देखते एक दिन वह मजाक वंशावली बन गया।

इसीलिए सरनेम को केवल “Last Name” कहना उसके साथ थोड़ी ज्यादती है। वह हमेशा last नहीं होता, कई संस्कृतियों में first भी होता है; वह हमेशा family name भी नहीं होता, कई बार पिता का नाम होता है; वह हमेशा जन्म से नहीं मिलता, कभी चुना जाता है; और वह हमेशा केवल पहचान नहीं बताता—कभी पहचान बनाता भी है।

शायद इसीलिए आदमी के नाम की सबसे दिलचस्प बात उसका पहला हिस्सा नहीं, उसके बाद आने वाला वह छोटा-सा शब्द है, जिसके पीछे कभी-कभी पूरा खानदान खड़ा होता है।

नाम व्यक्ति की आवाज़ है।

सरनेम उसकी प्रतिध्वनि।

और प्रतिध्वनि की खासियत यही है कि आवाज़ खत्म हो जाने के बाद भी वह कुछ देर तक सुनाई देती रहती है।

नाम मनुष्य की पहली पहचान है, लेकिन सरनेम—या उपनाम/कुलनाम—उस पहचान के पीछे खड़ी हुई पूरी कहानी। किसी के नाम के पीछे गाँव छिपा है, किसी के पीछे पेशा, किसी के पीछे पिता का नाम, किसी के पीछे कोई पुरखा, कोई राजा, कोई नदी, कोई पहाड़ और कभी-कभी कोई ऐसा उपनाम भी, जो सदियों पहले मज़ाक में पड़ा होगा और फिर खानदान की स्थायी मुहर बन गया।
एक सावधानी पहले ही ज़रूरी है: दुनिया में सरनेम के प्रकारों या कुल सरनेमों की कोई एक सर्वमान्य, आधिकारिक संख्या नहीं है। अलग-अलग देशों में “surname”, “family name”, “clan name”, “patronymic”, “house name” और “title” की परिभाषाएँ अलग हैं। इसलिए दी गई संख्या वैज्ञानिक वर्गीकरण की सुविधाजनक श्रेणियाँ हैं, न कि पूरी दुनिया के सरनेमों की अंतिम जनगणना।

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