रविवार, 13 सितंबर 2026

निठल्ले के नोट्स - गुलज़ार के '92' साल का राज़

गुलज़ार के 92 साल पूरे होना महज किसी मशहूर शायर का जन्मदिन नहीं है। यह उस दौर में एक दिलचस्प घटना है, जब उम्र बढ़ने के साथ बहुत-से लोग सक्रिय जीवन से धीरे-धीरे किनारा करने लगते हैं, जबकि गुलज़ार आज भी शब्दों, विचारों और सृजन के संसार में मौजूद हैं। 18 अगस्त 1934 को अविभाजित भारत के झेलम जिले के दीना में जन्मे संपूर्ण सिंह कालरा यानी गुलज़ार ने 2026 में 92 वर्ष पूरे किए और 93वें वर्ष में प्रवेश किया।

गुलज़ार की लंबी उम्र का राज़ पूछना आसान है, लेकिन उसका कोई एक नुस्खा शायद उनके पास भी नहीं होगा। उम्र कोई ऐसी पहेली नहीं कि उसकी चाबी किसी डिब्बे में रखी हो और खोलते ही 90 पार करने का फार्मूला निकल आए। फिर भी गुलज़ार के जीवन को देखें तो कुछ सूत्र साफ दिखाई देते हैं। पहला सूत्र है—सक्रिय रहना। 2024 में उन्होंने बताया था कि वह टेनिस खेलते रहे हैं और उम्र बढ़ने के साथ जिम में व्यायाम करते हैं। यानी शरीर को उन्होंने उम्र का बहाना बनाकर निष्क्रिय नहीं होने दिया।

लेकिन शायद गुलज़ार की असली एक्सरसाइज शरीर की नहीं, दिमाग की है। उनके लिए लिखना कोई नौकरी नहीं, जीवन जीने का तरीका है। कविता लिखना, गीत लिखना, पटकथा लिखना, पढ़ना, अनुवाद करना, नए विषयों से जुड़ना—इन सबने उनके मस्तिष्क को लगातार काम में लगाए रखा। उम्र के साथ शरीर की गति भले धीमी हो, लेकिन जिस व्यक्ति का मन लगातार जिज्ञासु बना रहे, उसके भीतर समय की रफ्तार कुछ अलग हो जाती है। गुलज़ार की मेज, किताबें और कागज उनके लिए शायद वही हैं जो किसी दूसरे व्यक्ति के लिए ट्रेडमिल है। 2025 में उनके घर पर हुए एक विस्तृत संवाद में उनका अध्ययन-कक्ष उनके सबसे आरामदेह और प्रिय स्थान के रूप में सामने आया था।

उनकी दिनचर्या में काम और अनुशासन भी महत्वपूर्ण दिखाई देता है। 2019 में 84 वर्ष की उम्र में उनके बारे में प्रकाशित एक प्रोफाइल में बताया गया था कि वह अपने घर-कम-कार्यस्थल में घंटों काम करते, दोपहर में छोटा-सा विराम लेते और शाम तक काम समेटते थे। यानी उनके लिए रिटायरमेंट का अर्थ शायद काम बंद करना नहीं, बल्कि काम करने के तरीके को बदलना रहा है। यह भी लंबी सक्रिय उम्र का एक महत्वपूर्ण सूत्र हो सकता है—काम करते रहिए, लेकिन काम को अपने ऊपर सवार मत होने दीजिए।

गुलज़ार के व्यक्तित्व का एक और महत्वपूर्ण पहलू है—सकारात्मकता। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को स्वीकार किया, लेकिन उन्हें अपनी पहचान नहीं बनने दिया। 2024 में उन्होंने कहा कि वह खुशमिजाज व्यक्ति हैं और उनका जीवन कोई ‘दुख भरी कहानी’ नहीं है। उन्होंने कलाकारों के संघर्ष को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा माना। यह बात मामूली लग सकती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ मनुष्य के स्वास्थ्य पर मानसिक दृष्टिकोण का बड़ा असर पड़ता है। हर पुराने दुख को रोज कुरेदना और हर बीती बात का हिसाब रखना मन को बूढ़ा करता है। गुलज़ार ने शायद दुख को कविता बना दिया, इसलिए उसे ढोना नहीं पड़ा।

उनकी लंबी उम्र में जिज्ञासा और बदलते समय के साथ संवाद भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। गुलज़ार केवल अपने जमाने के शायर बनकर नहीं बैठे रहे। उन्होंने कविता से फिल्मों तक, गीतों से पटकथा तक, साहित्य से टेलीविजन तक और बच्चों के साहित्य से अनुवाद तक लगातार अपने रचनात्मक क्षेत्र का विस्तार किया। 92 वर्ष की उम्र में भी उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अतीत की स्मृति भर नहीं हैं; वे वर्तमान की सांस्कृतिक बातचीत का हिस्सा बने हुए हैं।

यहां एक दिलचस्प विरोधाभास है। आम तौर पर हम लंबी उम्र का मतलब समझते हैं—कम खाना, खूब व्यायाम करना, दवाइयां समय पर लेना, तनाव से दूर रहना और डॉक्टर की सलाह मानना। ये सब निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गुलज़ार का जीवन हमें एक और चीज याद दिलाता है—जीवन में कोई ऐसा काम होना चाहिए जिसके लिए अगली सुबह उठने का मन करे। गुलज़ार के पास वह काम शब्द हैं। कलम उनके लिए शायद वही काम करती है जो किसी व्यक्ति के लिए सुबह की सैर करती है।

उनके जीवन का एक और रहस्य शायद सादगी है। गुलज़ार की सार्वजनिक छवि चमक-दमक से ज्यादा सादगी की है—सफेद कुरता-पायजामा, किताबें, कागज, कलम और शब्द। उनकी लोकप्रियता जितनी विराट है, उनका निजी रचनात्मक संसार उतना ही आत्मकेंद्रित और शांत दिखाई देता है। प्रसिद्धि को जीवन का उद्देश्य न बनाकर सृजन को उद्देश्य बनाए रखना व्यक्ति को प्रसिद्धि के तनाव से बचा सकता है।

और शायद सबसे बड़ा रहस्य है—उम्र को उम्र की तरह न लेना। 92 वर्ष का आदमी अगर हर सुबह अपने आपको 92 साल का मानकर उठेगा तो शरीर पहले बूढ़ा होगा और मन बाद में। लेकिन जो व्यक्ति पूछता रहे कि आज क्या नया लिखा जा सकता है, आज कौन-सी किताब पढ़ी जा सकती है, आज किसी पुराने शब्द को नए अर्थ में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है—उसके भीतर समय का कैलेंडर बदलता रहता है। गुलज़ार के साथ यही दिखाई देता है।

इसलिए गुलज़ार की लंबी उम्र का राज़ किसी महंगे सप्लीमेंट, किसी चमत्कारी डाइट या किसी गुप्त योगासन में तलाशना शायद उनके साथ अन्याय होगा। उनका असली नुस्खा शायद बहुत साधारण है—शरीर को सक्रिय रखो, दिमाग को व्यस्त रखो, मन में जिज्ञासा बचाए रखो, अपने काम से प्रेम करो, अतीत को बोझ मत बनने दो और वर्तमान से संवाद बंद मत करो। व्यायाम उनके शरीर को चलाता रहा, लेकिन शब्द उनके भीतर के आदमी को चलाते रहे।

92 साल की उम्र में गुलज़ार इसलिए महत्वपूर्ण नहीं हैं कि उन्होंने 92 वर्ष पूरे कर लिए हैं। महत्वपूर्ण यह है कि 92 साल जीने के बाद भी उनके भीतर जीवन बचा हुआ है। उम्र का असली सवाल यह नहीं कि कैलेंडर में कितने साल जुड़ गए, बल्कि यह है कि उन वर्षों में कितनी जिज्ञासा, कितनी रचनात्मकता और कितनी संवेदना बची रही। गुलज़ार इस कसौटी पर सिर्फ लंबी उम्र वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि लंबे समय तक जवान रहने वाले मनुष्य दिखाई देते हैं।

और शायद गुलज़ार के 92 साल का सबसे खूबसूरत राज़ यही है—**उन्होंने उम्र को बढ़ने दिया, लेकिन खुद को बूढ़ा होने नहीं दिया।**

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