तलवार का होना और तलवार में धार होना—ये दोनों अलग-अलग बातें हैं। तलवार अपने आकार, चमक और वजन से डर पैदा कर सकती है, लेकिन युद्ध का परिणाम उसकी चमक से नहीं, उसकी धार से तय होता है। यही बात मनुष्य, उसकी शक्ति, उसकी प्रतिभा, उसकी प्रतिष्ठा और उसके व्यक्तित्व पर भी लागू होती है। दुनिया में बहुत-सी चीजें देखने में प्रभावशाली होती हैं, लेकिन उनका प्रभाव वास्तविक नहीं होता। कुछ लोग बहुत ऊंची आवाज में बोलते हैं, कुछ अपने पद का रौब दिखाते हैं, कुछ अपने संपर्कों की लंबी सूची गिनाते हैं और कुछ अपनी उपलब्धियों का इतना प्रचार करते हैं कि लगता है मानो दुनिया में उनसे बड़ा कोई योद्धा पैदा ही नहीं हुआ। लेकिन समय एक ऐसा कुशल लोहार है जो धीरे-धीरे हर तलवार की असली धार जांच देता है।
हर हाथ में तलवार हो सकती है, लेकिन हर हाथ तलवार चलाना नहीं जानता। शक्ति मिल जाना और शक्ति का सदुपयोग कर पाना अलग-अलग गुण हैं। पद मिल जाना नेतृत्व की गारंटी नहीं है, पैसा आ जाना समृद्धि की गारंटी नहीं है, डिग्रियां मिल जाना ज्ञान की गारंटी नहीं है और प्रसिद्ध हो जाना महान होने की गारंटी नहीं है। कई बार हमारे पास साधन बहुत होते हैं, लेकिन साधने की क्षमता कम। हम हथियारों से लैस होते हैं, लेकिन लक्ष्य के सामने पहुंचते ही पता चलता है कि निशाना लगाना सीखा ही नहीं। इसलिए जीवन में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं कि हमारे पास क्या है; यह भी देखना जरूरी है कि जो हमारे पास है, उसमें वास्तविक क्षमता कितनी है।
आज के समय में तो तलवार की जगह उसके म्यान का महत्व कई बार बढ़ गया है। सोशल मीडिया ने ऐसी दुनिया बना दी है जहां व्यक्ति अपनी उपलब्धियों की चमक को जितना चाहे बढ़ाकर दिखा सकता है। कोई अपने जीवन का ऐसा संस्करण प्रस्तुत करता है जिसमें असफलता के लिए कोई जगह नहीं, कोई अपनी विद्वत्ता का ऐसा प्रदर्शन करता है कि उसके सामने विश्वकोश भी छोटा दिखाई दे, और कोई अपने प्रभाव का ऐसा विज्ञापन करता है जैसे आधी दुनिया उसकी फोन डायरी में रहती हो। लेकिन आभासी दुनिया की चमक और वास्तविक जीवन की धार एक चीज नहीं है। कैमरे के सामने प्रभावशाली दिखाई देना और संकट के समय प्रभावी सिद्ध होना दो अलग-अलग परीक्षाएं हैं।
असल धार का पता तब चलता है जब परिस्थिति हमारे पक्ष में न हो। जब कोई आपकी प्रशंसा नहीं कर रहा हो, तब भी आप अपना काम कितनी ईमानदारी से करते हैं; जब अधिकार आपके हाथ में हो, तब भी आप दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं; जब असफलता सामने खड़ी हो, तब आप टूटते हैं या उससे सीखते हैं; जब कोई आपसे असहमत हो, तब आप संवाद करते हैं या उसे दुश्मन बना लेते हैं—यहीं चरित्र की धार दिखाई देती है। अनुकूल परिस्थितियों में तो लगभग हर व्यक्ति अच्छा दिखाई देता है। असली परीक्षा प्रतिकूल परिस्थितियां लेती हैं।
कई बार हम तलवार की धार को उसकी कठोरता समझ लेते हैं। हमें लगता है कि जो व्यक्ति सबसे ज्यादा आक्रामक है, वही सबसे शक्तिशाली है। लेकिन आक्रामकता और क्षमता में कोई आवश्यक संबंध नहीं। चिल्लाना आसान है, समझाना कठिन। धमकी देना आसान है, विश्वास पैदा करना कठिन। किसी को दबा देना आसान है, किसी को साथ लेकर चलना कठिन। इसलिए हर तेज आवाज में शक्ति नहीं होती और हर शांत आवाज कमजोर नहीं होती। कभी-कभी सबसे धारदार तलवार म्यान में रहती है और उसे बार-बार बाहर निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
मनुष्य के जीवन में ज्ञान भी एक तलवार है, लेकिन ज्ञान का होना और विवेक का होना अलग बात है। बहुत पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी गलत निर्णय ले सकता है और कम पढ़ा व्यक्ति भी जीवन की किसी महत्वपूर्ण बात को बहुत गहराई से समझ सकता है। सूचना हमें बहुत कुछ बता सकती है, लेकिन विवेक यह तय करता है कि उस सूचना के साथ करना क्या है। आज हमारे पास पहले से कहीं अधिक जानकारी है, लेकिन क्या हम पहले से अधिक समझदार भी हुए हैं? यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना विवेक का ज्ञान भी कभी-कभी ऐसी तलवार बन जाता है जिसकी धार गलत दिशा में चलती है।
धन भी एक तलवार है। उससे अवसर खरीदे जा सकते हैं, सुविधा प्राप्त की जा सकती है और प्रभाव बनाया जा सकता है। लेकिन धन व्यक्ति को संवेदनशील, संतुलित या संतुष्ट नहीं बना सकता। इसी तरह पद सत्ता देता है, लेकिन सम्मान नहीं खरीद सकता। पद समाप्त होते ही यदि लोग आपके आसपास से गायब हो जाएं तो समझिए कि आपके पास पद की तलवार थी, व्यक्तित्व की धार नहीं। असली प्रभाव वह है जो कुर्सी हट जाने के बाद भी बना रहे।
कभी-कभी जिंदगी में हमारी सबसे बड़ी समस्या यह नहीं होती कि हमारी तलवार में धार नहीं है, बल्कि यह होती है कि हम अपनी तलवार को बहुत धारदार समझ बैठे हैं। अति-आत्मविश्वास मनुष्य को अपनी वास्तविक क्षमता से अनजान बना देता है। उसे लगता है कि वह जो चाहे कर सकता है, जबकि परिस्थितियां चुपचाप उसकी सीमाओं का हिसाब रख रही होती हैं। विनम्रता इसलिए कमजोरी नहीं है। विनम्र व्यक्ति अपनी सीमाओं को पहचानता है और इसलिए अपनी शक्ति का बेहतर उपयोग कर पाता है। जिसे अपनी तलवार की धार का अंदाजा है, वह हर राहगीर के सामने उसे लहराता नहीं फिरता।
यह बात रिश्तों पर भी लागू होती है। रिश्ते भी एक प्रकार की तलवार हैं—उनमें प्रेम की धार हो तो कठिन समय काट देते हैं और यदि उनमें स्वार्थ, अहंकार तथा अविश्वास भर जाए तो वही रिश्ते मनुष्य को भीतर से घायल करने लगते हैं। किसी रिश्ते की मजबूती इस बात से नहीं पता चलती कि उसमें कितनी बातें होती हैं, बल्कि इस बात से पता चलती है कि कठिन समय में कितनी चुप्पियां भी समझी जाती हैं। जिस रिश्ते को हर बार प्रमाण की जरूरत पड़े, उसकी धार शायद पहले ही कुंद हो चुकी है।
और शायद जीवन की सबसे महत्वपूर्ण तलवार है—समय। समय के पास कोई चमकदार मूठ नहीं, कोई म्यान नहीं और कोई शोर नहीं, लेकिन उससे अधिक धारदार कुछ नहीं। समय राजा और रंक, प्रतिभाशाली और औसत, ईमानदार और चालाक—सबकी असली परीक्षा करता है। जो आज बहुत प्रभावशाली दिखाई दे रहा है, जरूरी नहीं कि दस वर्ष बाद भी उतना ही प्रभावशाली रहे। समय धीरे-धीरे दिखा देता है कि किसकी चमक धातु की थी और किसकी केवल पॉलिश की।
इसलिए जीवन में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि हमारे पास कितनी बड़ी तलवार है। सवाल यह होना चाहिए कि उसमें कितनी धार है। हमारे पास कितने परिचित हैं, यह कम महत्वपूर्ण है; उनमें कितने वास्तविक संबंध हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है। हमारे पास कितनी डिग्रियां हैं, यह कम महत्वपूर्ण है; उनसे हमारी समझ कितनी बढ़ी, यह अधिक महत्वपूर्ण है। हमारे पास कितनी संपत्ति है, यह कम महत्वपूर्ण है; उससे हमारा जीवन और दूसरों का जीवन कितना बेहतर हुआ, यह अधिक महत्वपूर्ण है। हमारी आवाज कितनी ऊंची है, यह कम महत्वपूर्ण है; हमारी बात में कितना वजन है, यह अधिक महत्वपूर्ण है।
अंततः जिंदगी हमें बार-बार यही सिखाती है कि प्रदर्शन की उम्र छोटी होती है और क्षमता की उम्र लंबी। म्यान देखकर प्रभावित होने वाले लोग बहुत मिलेंगे, लेकिन धार पहचानने वाले कम होंगे। इसलिए दूसरों को अपनी तलवार की चमक दिखाने से अधिक जरूरी है कि हम चुपचाप उसकी धार बनाए रखें—ज्ञान से, अनुभव से, अनुशासन से, संवेदनशीलता से और आत्ममंथन से।
क्योंकि हर तलवार में धार नहीं होती, हर चमक में रोशनी नहीं होती और हर शोर में शक्ति नहीं होती। असली ताकत वह है जिसे साबित करने के लिए बार-बार प्रदर्शन की जरूरत न पड़े। तलवार की असली पहचान उसके आकार से नहीं, उसके उस एक वार से होती है जो सही समय पर, सही दिशा में और सही कारण से किया गया हो।

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