मंगलवार, 14 जनवरी 2025

15 जनवरी

15 जनवरी 
सेना दिवस 
भारतीय सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है। 1949 में इसी दिन फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे। यह पहला मौका था कि भारतीय सेना की कमान भारतीय नेतृत्व के अधीन थी, और यह परिवर्तन अपने आप में भारत के सैन्य इतिहास के समय में एक मील का पत्थर साबित हुआ. तब फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ़ के तौर पर पदभार ग्रहण किया था. फ्रांसिस बुचर भारतीय सेना में कमांडर-इन-चीफ़ का पद धारण करने वाले अंतिम ब्रिटिश व्यक्ति थे. फील्ड मार्शल केएम करियप्पा उस समय लेफ्टिनेंट जनरल थे. उस समय करियप्पा की उम्र थी 49 साल. केएम करियप्पा ने 'जय हिंद' का नारा अपनाया जिसका मतलब है 'भारत की जीत'.तब से 15 जनवरी से हर साल भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है.यह दिन राष्ट्रीय रक्षा, शांति स्थापना और एकता को बढ़ावा देने में सेना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। इस दिन भारतीय सैनिकों की उपलब्धियों, देश सेवा, अप्रतिम योगदान और त्याग को सम्मानित किया जाता है. भारतीय सेना में इन्फ़ैंट्री रेजिमेंट की तादाद कुल 27 है. इन्फ़ैंट्री रेजिमेंट का इस्तेमाल पैदल युद्ध यानी जमीनी लड़ाई के लिए किया जाता है.भारतीय सेना को कुल 40 डिवीज़न और 14 कोर में बांटा गया है, जिसमें भारतीय सेना के कुल 14 लाख से ज़्यादा सक्रिय जवान हैं, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना भी है. भारतीय सेना की स्थापना 1 अप्रैल, 1895 में हुई थी. भारतीय सेना ने अब तक चार जंग लड़ी हैं, जिनमें साल 1948, 1965, 1971, और करगिल में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ और 1962 में चीन के ख़िलाफ़ लड़ाई शामिल हैं. (विविध स्रोत)

14 जनवरी

14 जनवरी 

सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस
Armed Forces Veterans Day 
भारतीय सशस्त्र बलों के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ फिल्ड मार्शल के۔ एम۔ करियप्पा की सेवाओं की मान्यता और सम्मान में 14 जनवरी को वर्ष 2017 से हर साल सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस मनाया जाता है। श्री करियप्पा 14 जनवरी, 1953 को सेवानिवृत्त हुए थे। सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस पर स्मरणोत्सव में राष्ट्र की सेवा में दिग्गज सैनिकों की निस्वार्थ भक्ति और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है। 14 जनवरी का यह दिन हमें भारतीय सैनिकों की बहादुरी और उनके योगदान  की महत्ता भी याद दिलाता है। 2016 में भारतीय सरकार ने आधिकारिक रूप से 14 जनवरी को सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों की निस्वार्थ भक्ति, बलिदान और सेवा को याद करना और उनका सम्मान करना है। यह दिन हमारे पूर्व सैनिकों की वीरता, संघर्ष, और समाज के प्रति उनकी समर्पण भावना को मान्यता देने का अवसर है।

मकर संक्रांति 
प्रति वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व होता है. पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब ये पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति से ही ऋतु परिवर्तन भी होने लगता है. इस दिन स्नान और दान-पुण्य जैसे कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने और खाने का खास महत्व होता है. इसी कारण इस पर्व को कई जगहों पर खिचड़ी का पर्व भी कहा जाता है.मकर संक्रांति को उत्तरायण, खिचड़ी, पोंगल और बिहू के नाम से भी जाना जाता है। पूरे देश में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है और इस दिन घर-घर में खिचड़ी बनाई जाती है। वहीं बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा है। 
(विविध स्रोत)

सोमवार, 13 जनवरी 2025

13 जनवरी

13 जनवरी 
सार्वजनिक रेडियो प्रसारण दिवस
प्रतिवर्ष 13 जनवरी को सार्वजनिक रेडियो प्रसारण दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों के कार्यों के सम्मान के लिए मनाया जाता है जिन्होंने रेडियो का आविष्कार कर पहला सार्वजनिक रेडियो प्रसारण किया। यह दिन हमें रेडियो का महत्व याद दिलाता है। सार्वजनिक रेडियो प्रसारण दिवस हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य रेडियो के महत्व को समझाना और उसके योगदान को मान्यता देना है। रेडियो, जो कभी एक सूचना और शिक्षा का प्रमुख साधन था, आज भी समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह दिन रेडियो प्रसारण की शुरुआत के ऐतिहासिक क्षण को याद करने का अवसर है। भारत में सार्वजनिक रेडियो प्रसारण की शुरुआत के बाद रेडियो ने न केवल लोगों तक जानकारी पहुंचाने का काम किया, बल्कि यह समाज की शिक्षा और जागरूकता का महत्वपूर्ण माध्यम भी बना। सार्वजनिक रेडियो प्रसारण दिवस रेडियो के इस योगदान को स्वीकार करने और इसकी भूमिका को समाज में महत्व देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि कैसे रेडियो ने विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में लोगों को जोड़ने और उन्हें समाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक घटनाओं से अवगत करने का काम किया है। न्यूयॉर्क में 13 जनवरी 1910 को दुनिया का पहला सार्वजनिक रेडियो प्रसारण किया गया था। भारत में रेडियो इसके सत्रह बरस बाद आया। 23 जुलाई 1927 को मुंबई रेडियो-स्टेशन का उद्‌घाटन हुआ था। इसलिए 23 जुलाई को भारत में ‘राष्ट्रीय प्रसारण दिवस’ मनाया जाता है। 

लोड़ही 
लोहड़ी का त्योहार आमतौर पर 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह विशेष रूप से पंजाब और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार सर्दी के मौसम और कृषि के महत्व से जुड़ा हुआ है। इसे मकर संक्रांति के साथ मनाया जाता है, जो नए कृषि वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। लोहड़ी का त्योहार फसल की कटाई के समय मनाया जाता है। इस दिन लोग अलाव जलाते हैं, नाचते गाते हैं, और एक-दूसरे से अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। यह त्योहार कृषि समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फसल की समृद्धि और कृषि जीवन के संघर्षों से उबरने की खुशी का प्रतीक है। लोहड़ी का त्योहार कृषि परंपराओं को सम्मानित करने, समुदाय को एकजुट करने और समृद्धि की कामना करने का एक अवसर है। इसके अलावा, यह दिन विशेष रूप से किसानों और खेतिहर मजदूरों के संघर्ष और मेहनत को मान्यता देने का अवसर प्रदान करता है। लोहड़ी के दौरान परिवार, दोस्त और पड़ोसी एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं, जो सामूहिकता और भाईचारे का प्रतीक है। (विविध स्रोत)


शनिवार, 11 जनवरी 2025

12 जनवरी

12 जनवरी 
राष्ट्रीय युवा दिवस 
National Youth Day 
स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर 12 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। इस दिन को भारत सरकार ने साल 1984 में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था। स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और मानवता के प्रतीक थे। उनका जीवन और उनके विचार पूरी दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बन गए। उन्होंने भारतीय दर्शन, वेदांत और योग को पश्चिमी देशों में प्रस्तुत किया और भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। विवेकानंद जी ने अमेरिका के शिकागो शहर में हुई विश्व धर्म सभा को संबोधित किया और अपने ओजस्वी भाषण से हर किसी को प्रभावित किया। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने भीतर विश्वास रखने की प्रेरणा दी। उनके विचार युवाओं को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं। इसीलिए स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है । स्वामी विवेकानंद' का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व स्वामी विवेकानन्द जी के विचार और कार्यों को को युवाओं के बीच पहुंचाना है ताकि देश के विकास के लिए किए जाने वाले कार्यों में युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। (विविध स्रोत)

शुक्रवार, 10 जनवरी 2025

11 जनवरी

11 जनवरी 
मानव तस्करी जागरूकता दिवस 
National Human Trafficking Awareness Day,
11 जनवरी को अमेरिका में राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस मनाया जाता है, जिसे WearBlueDay के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है मानव तस्करी की निरंतर समस्या के बारे में जागरूकता फैलाना। साथ ही मानव तस्करी पीड़ितों के अधिकारों को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना। इस अवसर पर, कई संगठन विभिन्न कार्यक्रम और अभियान आयोजित करते हैं। राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस की स्थापना 2007 में सीनेटर डायने फेंस्टीन (डी-कैलिफ़ोर्निया), जॉन कॉर्निन (आर-टेक्सास), बराक ओबामा (डी-आईएल), और डिक लुगर (आर-आईएन) द्वारा की गई थी। उसके बाद 2007 में, संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने 11 जनवरी को राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस के रूप में मनाने की पुष्टि के। तब से लेकर हर साल 11 जनवरी को ये दिवस मनाया जाता है। मानव तस्करी एक ऐसा गंभीर अपराध है जिसमें किसी व्यक्ति को जबरन बलात्कार, वेश्यावृत्ति, या अन्य प्रकार के शोषण के लिए मजबूर किया जाता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति से देह व्यापार, गुलामी इत्यादि उनके इच्छा के विरुद्ध कराये जाते हैं। यह आधुनिक प्रकार का अपराध दुनियाभर में बहुत तेजी से अपने पंख फैला रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 2,25,000 लोग मानव तस्करी का शिकार होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय धन्यवाद दिवस 
International Thank You Day 
अंतर्राष्ट्रीय धन्यवाद दिवस हर साल 11 जनवरी को मनाया जाता है। यह एक ऐसा दिन है जो हमें याद दिलाता है कि हमें उन लोगों के प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहिए जिन्होंने किसी तरह से हमारे जीवन को बेहतर बनाया है। साल की शुरुआत से बेहतर इस पर विचार करने का महीना और क्या हो सकता है? हम अक्सर "धन्यवाद" कहना भूल जाते हैं, क्योंकि हम इसे हल्के में लेते हैं या हम मान लेते हैं कि दूसरे जानते हैं कि हम कैसा महसूस करते हैं। इस दिन की शुरूआत हमेशा धन्यवाद कहने के महत्व को पहचानने के लिए की गई थी।माना जाता है कि 'धन्यवाद' शब्द की उत्पत्ति लगभग 450 और लगभग 1100 के बीच हुई थी। पुरानी अंग्रेज़ी संज्ञा का अर्थ था "विचार।" इसके अर्थ की प्रगति को "ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी" द्वारा प्रलेखित किया गया था, और यह "अनुकूल विचार या भावना, सद्भावना" बन गया। यह आगे चलकर मध्य युग में "किसी के प्रति उपकार या सेवाओं के लिए दयालु विचार या भावना" में विकसित हुआ। धन्यवाद कहने की आदत 16वीं और 17वीं शताब्दी की वाणिज्यिक क्रांति के दौरान शुरू हुई। यह मध्यम वर्ग के बीच लोकप्रिय था जो इसे अक्सर इस्तेमाल करते थे क्योंकि यह एक ऐसी भाषा थी जिसे कार्यालयों और दुकानों में सुना और इस्तेमाल किया जाता था। पिछले 500 वर्षों से इसका उपयोग दुनिया भर में फैल गया है। (विविध स्रोत)

गुरुवार, 9 जनवरी 2025

10 जनवरी

10 जनवरी 
विश्व हिन्दी दिवस 
दुनिया भर में हिन्दी भाषा प्रेमी, 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर, हिन्दी की मधुरता का जश्न मनाते हैं. अंग्रेज़ी और चीनी भाषा के बाद, हिन्दी विश्व स्तर पर तीसरी सबसे ज़्यादा बोली जाने वाला भाषा है. अनुमानों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोग हिन्दी भाषी हैं. संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक व सांस्कृतिक संगठन - UNESCO ने 1948 में हिन्दी को अपनी आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया था. तभी से भारत व पड़ोसी देशों में यूनेस्को का बहुत सारा काम हिन्दी में किया जाता है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में, पहली बार 1949 में हिन्दी भाषा का प्रयोग हुआ था. भारत में 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाए जाने की घोषणा की थी। तभी से यह दिवस विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है. दरअसल विश्व में हिन्दी का विकास करने और इसे प्रचारित- प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। इसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसीलिए इस दिन को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे मनाने का एक खास मकसद दुनियाभर में हिंदी भाषा बोलने वालों को एक सूत्र में पिरोना है। भारत के अलावा, फ़िज़ी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, केनया, यूगाण्डा, तंज़ानिया, बांग्लादेश, नेपाल जैसे देशों में भी हिन्दी काफ़ी व्यापक दायरे में बोली और समझी जाती है, और हिन्दी विश्व में चौथी सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है. यूनेस्को में भारत के स्थाई प्रतिनिधिमण्डल के आँकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में हिन्दी बोलने और समझने वाले लगभग 10 लाख लोग रहते हैं. ब्रिटेन (UK) में लगभग 50 हज़ार हिन्दी भाषी बसते हैं, जबकि जर्मनी में भी लगभग 20 हज़ार हिन्दी भाषी व प्रेमी रहते हैं. न्यूज़ीलैण्ड और सिंगापुर में भी बड़ी संख्या में हिन्दी भाषी लोग हैं.विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस में स्थित है और अनेक देशों में हिन्दी को सरकारी संरक्षण हासिल है. (विविध स्रोत)

बुधवार, 8 जनवरी 2025

9 जनवरी

9 जनवरी 
प्रवासी भारतीय दिवस 
प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) भारत के विकास में प्रवासी भारतीय समुदाय के हर योगदान के लिए 9 जनवरी को मनाया जाता है। 9 जनवरी के दिन इस अवसर का जश्न मनाने के बाद 1915 में इस दिन पर महात्मा गांधी, सबसे बड़े प्रवासी, दक्षिण अफ्रीका से भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया गया और हमेशा के लिए भारतीयों के जीवन को बदल दिया गया। के रूप में चुना गया था. 2003 के बाद से हर साल आयोजित होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलनों में प्रवासी भारतीय समुदाय एक मंच के रूप में सरकार और शैक्षिक रूप से अपने देश की भूमि के लोगों के साथ जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं। इन सम्मेलनों में प्रवासी भारतीय समुदाय दुनिया के विभिन्न संस्कृतियों में रहने वाले के बीच नेटवर्किंग में भी बहुत उपयोगी होते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपने समुदायों को साझा करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना है।प्रवासी भारतीय दिवस हर दो साल में एक बार मनाया जाता है, ताकि भारत सरकार के साथ प्रवासी भारतीय समुदाय के जुड़ाव को मजबूत किया जा सके और उन्हें उनकी सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जोड़ा जा सके।  2015 से, इसके प्रारूप को संशोधित किया गया है, ताकि हर दो साल में एक बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जा सके और इस बीच की अवधि में प्रवासी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और हितधारकों की भागीदारी के साथ थीम आधारित प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित किए जा सकें। ये सम्मेलन प्रवासी भारतीय समुदाय को पारस्परिक रूप से लाभकारी गतिविधियों के लिए अपने पूर्वजों की भूमि की सरकार और लोगों के साथ जुड़ने का एक मंच प्रदान करते हैं। ये सम्मेलन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच नेटवर्किंग में भी बहुत उपयोगी हैं और उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा करने में सक्षम बनाते हैं।