हाँ, इस तरह के सर्वे हुए हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है: दुनिया में ऐसा कोई विश्वसनीय सर्वे मुझे नहीं मिला जो पूरी Gen Z को “इतने प्रतिशत पढ़ाकू, इतने प्रतिशत मौज-मस्ती वाले, इतने प्रतिशत गंभीर और इतने प्रतिशत लापरवाह” जैसी चार श्रेणियों में बाँटता हो। ऐसी श्रेणियाँ वैज्ञानिक सर्वेक्षण की सामान्य श्रेणियाँ भी नहीं हैं। उपलब्ध शोध अलग-अलग सवाल पूछता है—करियर, शिक्षा, पैसा, मानसिक स्वास्थ्य, मनोरंजन, खेल, सामाजिक जीवन, तकनीक आदि। इसलिए इन अलग-अलग आंकड़ों को जोड़कर यह कहना कि “60% गंभीर और 20% लापरवाह” होगा, भ्रामक होगा।
सबसे बड़ा और उपयोगी संदर्भ अभी Deloitte का 2026 Global Gen Z and Millennial Survey है। 2026 के सर्वे में 44 देशों के 23,000 से अधिक Gen Z और millennials शामिल हैं। इसका निष्कर्ष यह नहीं है कि Gen Z काम या करियर से भागना चाहती है; बल्कि तस्वीर यह है कि वह करियर चाहती है, लेकिन करियर का अर्थ केवल पदोन्नति और ऊँची कुर्सी नहीं मानती। केवल 25% Gen Z ने तेज गति से career progression और rapid promotions को प्राथमिकता दी; बहुसंख्यक धीरे-धीरे आगे बढ़ने या अनुभव हासिल करने के लिए lateral moves को स्वीकार करने की ओर हैं।
2025 के Deloitte सर्वे में तो पढ़ाई और skill development की ओर झुकाव और स्पष्ट दिखाई देता है। 70% Gen Z respondents ने कहा कि वे सप्ताह में कम-से-कम एक बार अपने career को आगे बढ़ाने के लिए skills विकसित कर रहे हैं और 67% काम के घंटों के बाहर भी skills विकसित करते हैं। 86% ने communication, leadership, empathy और networking जैसी soft skills को career progression के लिए महत्वपूर्ण माना। यानी “Gen Z पढ़ना नहीं चाहती, बस मोबाइल चलाना चाहती है”—इस लोकप्रिय धारणा को उपलब्ध आंकड़े समर्थन नहीं करते।
लेकिन यहाँ एक दिलचस्प बदलाव है। Gen Z पढ़ाई के खिलाफ नहीं है; वह ऐसी पढ़ाई के खिलाफ हो सकती है जिसका परिणाम उसे दिखाई नहीं देता। 2025 के वैश्विक सर्वे में 31% Gen Z respondents ने कहा कि उन्होंने higher education न करने का फैसला किया। इसका एक बड़ा संदर्भ यह है कि 40% ने tuition की ऊँची लागत को चिंता बताया, 24% ने curriculum की job-market relevance पर सवाल उठाया और 28% ने higher education में practical experience की कमी को चिंता बताया। यानी सवाल “पढ़ना है या नहीं?” से ज्यादा “जो पढ़ रहे हैं उसका फायदा क्या होगा?” का है।
भारत की तस्वीर भी इसी दिशा में जाती है, बल्कि यहाँ career और practical learning का आग्रह काफी मजबूत दिखाई देता है। 2025 के Deloitte India survey में 505 Gen Z professionals समेत 809 भारतीय Gen Z और millennials शामिल थे। भारतीय Gen Z में 94% ने on-the-job learning को career growth के लिए उपयोगी माना। केवल 11% भारतीय Gen Z respondents ने कहा कि वे higher education नहीं करना चाहते/नहीं करेंगे—यह वैश्विक आंकड़े से कम है। साथ ही 52% भारतीय Gen Z respondents ने higher education की quality को लेकर असंतोष व्यक्त किया।
अब आते हैं आपके दूसरे सवाल—मौज-मस्ती कितनी और गंभीरता कितनी? यहाँ आंकड़ों को लेकर सावधान रहना होगा। कोई विश्वसनीय वैश्विक सर्वे यह नहीं कहता कि “X प्रतिशत Gen Z मौज-मस्ती में डूबी हुई है और Y प्रतिशत गंभीर है।” और ऐसा वर्गीकरण स्वयं बहुत कृत्रिम होगा। एक ही व्यक्ति सुबह परीक्षा की तैयारी कर सकता है, दोपहर में internship कर सकता है, शाम को gym या football खेल सकता है और रात को तीन घंटे reels देख सकता है। क्या उसे गंभीर कहेंगे या लापरवाह? Gen Z को समझने में यही गलती बार-बार होती है—उसके मनोरंजन को उसकी मानसिकता और उसके leisure को उसकी ambition का विरोधी मान लिया जाता है।
खेलों के मामले में भी यही स्थिति है। Gen Z में sports participation, fitness, esports, watching sports और casual gaming जैसी अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए “कितने प्रतिशत खेलों के प्रति झुकाव रखते हैं” का एक विश्वसनीय वैश्विक प्रतिशत बताना संभव नहीं है, जब तक यह तय न हो कि हम खेल खेलने, fitness करने, professional sports देखने या gaming में रुचि की बात कर रहे हैं। अलग-अलग देशों और सर्वेक्षणों में इनकी परिभाषाएँ और नमूने अलग हैं।
अगर उपलब्ध शोध को मिलाकर एक सावधान सामाजिक तस्वीर बनाई जाए, तो मुझे Gen Z कुछ इस तरह दिखाई देती है:
Gen Z: उपलब्ध सर्वेक्षणों से दिखने वाली कुछ प्रवृत्तियाँ
ये अलग-अलग प्रश्नों के सर्वेक्षण परिणाम हैं; इन्हें Gen Z की चार श्रेणियों में विभाजन नहीं समझना चाहिए।
Deloitte Global 2025–2026; प्रतिशत अलग-अलग सर्वे प्रश्नों के उत्तर हैं।
इन आंकड़ों से एक बहुत महत्वपूर्ण बात निकलती है। Gen Z को “कामचोर पीढ़ी” कहना आंकड़ों से मेल नहीं खाता; लेकिन उसे “हर समय career-oriented पीढ़ी” कहना भी गलत होगा। वह career चाहती है, लेकिन उसके बदले जीवन नहीं देना चाहती। 2025 के Deloitte सर्वे में 89% Gen Z ने job satisfaction और well-being के लिए purpose को महत्वपूर्ण माना। 2026 के सर्वे में भी stability, skills और well-being को तेज career growth की तुलना में अधिक महत्व देने की प्रवृत्ति सामने आई।
यही शायद Gen Z की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है—उसके लिए जीवन और career अलग-अलग compartments नहीं हैं। पुरानी पीढ़ी के लिए आदर्श यह हो सकता था कि पहले पढ़ो, फिर नौकरी पाओ, फिर मेहनत करके promotion लो, फिर पैसा कमाओ और अंततः जीवन का आनंद लो। Gen Z इस क्रम पर सवाल करती है। उसका सवाल है—“अगर जीवन अभी चल रहा है तो आनंद और मानसिक संतुलन retirement तक क्यों टालें?” इसलिए वह salary भी चाहती है, meaningful work भी, learning भी, flexibility भी और personal life भी। Deloitte ने इसे money, meaning और well-being के संतुलन के रूप में रेखांकित किया है।
और शायद यही वह जगह है जहाँ नेताओं और मीडिया की Gen Z को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी पैदा हो सकती है। जो युवा Instagram पर मजाक करता है, वही अपने career को लेकर अत्यंत गंभीर हो सकता है। जो युवा मीम बनाता है, वही AI के कारण अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हो सकता है। जो युवा weekend पर घूमता है, वही सोमवार को competitive examination की तैयारी कर सकता है। यानी उसकी गंभीरता का रूप बदल गया है; गंभीरता समाप्त नहीं हुई है।
इसलिए अगर मुझे केवल उपलब्ध शोध के आधार पर Gen Z का एक वाक्य में चरित्र-चित्रण करना हो, तो मैं कहूँगा—यह “लापरवाह पीढ़ी” से अधिक “व्यावहारिक पीढ़ी” है; यह “पढ़ाई-विरोधी” से अधिक “परिणाम-विरोधी पढ़ाई” की आलोचक है; यह “काम से भागने वाली” से अधिक “काम और जीवन के बीच अपनी शर्तों पर संतुलन चाहने वाली” पीढ़ी है।
और यहीं आपके मूल सवाल का शायद सबसे दिलचस्प उत्तर छिपा है: Gen Z को साधने के लिए उसके reels, slang और fashion की नकल करना शायद सबसे आसान काम है; उसकी असली आकांक्षाओं—रोजगार, कौशल, आर्थिक सुरक्षा, स्वतंत्रता, मानसिक संतुलन, meaningful life और भविष्य की अनिश्चितता—को समझना कहीं ज्यादा कठिन काम है। आंकड़े फिलहाल दूसरी तस्वीर की ओर अधिक संकेत करते हैं।

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